श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश में हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर की कुल क्षमता वर्तमान में 3540.15 मेगावाट है। दिसंबर 2026 तक इसके बढ़कर 5164.15 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। इस लक्ष्य को हासिल करने में दो बड़ी परियोजनाओं की मुख्य भूमिका होगी, जिनमें 1000 मेगावाट की पाकलदुल और 624 मेगावाट की किरू परियोजना शामिल है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इन दोनों ही महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का लगभग 78 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।
इसके अतिरिक्त, 12 मेगावाट की करनाह पनबिजली परियोजना का काम भी जून के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में जल विद्युत की कुल अनुमानित क्षमता लगभग 18,000 मेगावाट है, जिसमें से अब तक 15,000 मेगावाट क्षमता की पहचान की जा चुकी है। वर्तमान में उपयोग की जा रही 3540.15 मेगावाट क्षमता में 1197.4 मेगावाट के 13 राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट, 2250 मेगावाट के 6 केंद्रीय प्रोजेक्ट और 92.75 मेगावाट के 12 निजी क्षेत्र के प्रोजेक्ट शामिल हैं।
सरकार ने सदन में बताया कि सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद से प्रदेश में जारी ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण कार्यों ने रफ्तार पकड़ी है। सरकार अब शेष बची क्षमता के अधिकतम दोहन के लिए संभावित स्टोरेज प्रोजेक्ट्स की पहचान करने में जुटी है। प्रशासन का लक्ष्य वर्ष 2035 तक प्रदेश की पनबिजली क्षमता को तीन गुना कर लगभग 11,000 मेगावाट तक पहुंचाना है। इसके लिए अगले दस वर्षों का विस्तृत रोडमैप तैयार कर उस पर अमल शुरू कर दिया गया है। निजी क्षेत्र से भी आगामी वर्षों में 100 से 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की उम्मीद जताई गई है।