नम आंखों से हरीश राणा को विदाई: इच्छामृत्यु के ऐतिहासिक फैसले के बाद एम्स में हुआ निधन, परिवार ने किया अंगदान

नई दिल्ली। गाजियाबाद निवासी हरीश राणा का ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान परिवार, मित्रगण और ब्रह्माकुमारी संस्था के सदस्य मौजूद रहे। हरीश राणा को भाई और बहन ने मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई के समय परिजनों की आंखें नम थीं और माहौल गमगीन रहा। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय भी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

सुबह एम्स दिल्ली से हरीश राणा का पार्थिव शरीर श्मशान घाट लाया गया, जहां हिंदू रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी।

हरीश राणा का परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के प्लेटा गांव का निवासी है। उनके पिता अशोक राणा वर्ष 1989 में दिल्ली आए थे और होटल उद्योग में कार्यरत रहे। वर्ष 2013 में चंडीगढ़ में हुई एक दुर्घटना के बाद हरीश राणा कोमा में चले गए थे और तब से उनका इलाज चल रहा था।

करीब 13 वर्षों तक कोमा में रहने के बाद हरीश राणा का निधन हो गया। उन्हें भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति मिली थी। हाल ही में उन्हें गाजियाबाद स्थित घर से एम्स दिल्ली के उपशामक देखभाल इकाई में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

परिवार ने उनके निधन के बाद अंगदान का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। हरीश राणा के दो कॉर्निया और हार्ट वाल्व जैसे महत्वपूर्ण टिश्यू दान किए गए हैं, जिससे अन्य लोगों को जीवनदान मिल सकेगा। इस कदम को समाज में सराहनीय और प्रेरणादायक पहल माना जा रहा है।

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