बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पीएम-जनमन योजना के अंतर्गत मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) की खरीदी में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रस्तुत जनहित याचिका को निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के पश्चात याचिका को खारिज करने का निर्णय लिया।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उक्त याचिका ठोस साक्ष्यों के स्थान पर केवल मीडिया रिपोर्ट्स और सामान्य आरोपों पर आधारित है। अदालत के अनुसार, पर्याप्त प्रमाणों के अभाव में इसे जनहित याचिका के रूप में सुनवाई योग्य नहीं माना जा सकता। इसके अतिरिक्त, माननीय न्यायालय ने याचिकाकर्ता की मंशा और पात्रता पर भी प्रश्न चिन्ह लगाते हुए इसे जनहित के दृष्टिकोण से वास्तविक नहीं माना।
हाईकोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता के पास इस विषय में अन्य वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। याचिका खारिज करने के साथ ही अदालत ने जमा की गई सुरक्षा राशि को वापस करने के अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि यह पूरा मामला 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की खरीदी से संबंधित था, जिसमें 108 करोड़ रुपये के निवेश में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे।