नई दिल्ली/रायपुर। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियों के संरक्षण और कायाकल्प के लिए विस्तृत कार्ययोजना साझा की है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने महानदी, शिवनाथ, खारून, अर्पा, हसदेव और केलो नदियों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
सांसद अग्रवाल ने विशेष रूप से खारून जैसी नदियों में प्रदूषण के गंभीर स्तर पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने नदियों में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने, एनजीटी के मानकों को कड़ाई से लागू करने और नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि महानदी से लेकर खारून तक की नदियां राज्य की जीवन रेखा हैं और जनस्वास्थ्य व पर्यावरण की रक्षा के लिए नगर निकायों व उद्योगों द्वारा वास्तविक समय में नियमों का पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
गंदे पानी के शोधन के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार
नदियों में सीधे गिरते सीवेज को रोकने के लिए सरकार शोधन बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है। जिन 16 स्थानों पर अभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी निर्माणाधीन हैं, वहां अंतरिम उपाय के रूप में मल-गाद शोधन संयंत्र (एफएसटीपी) स्थापित किए गए हैं ताकि अनुपचारित कचरा नदियों में न मिले।
औद्योगिक इकाइयों पर सख्त निगरानी
औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जल प्रदूषण रोकथाम अधिनियम 1974 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, 17 अत्यधिक प्रदूषणकारी श्रेणियों वाले उद्योगों ने सफलतापूर्वक ऑनलाइन सतत बहिस्त्राव निगरानी प्रणाली स्थापित कर ली है। इसके अलावा, ताजे पानी पर निर्भरता कम करने के लिए उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग और शून्य तरल निर्वहन (जेडएलडी) के दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं।