लोकसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद देश की सियासत में भूचाल आ गया है। इस ऐतिहासिक हार के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करार दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दी है कि सरकार सोमवार को ही पुराना महिला आरक्षण विधेयक संसद में पेश करे, जिसे पहले भी सभी दलों का व्यापक समर्थन मिला था। प्रियंका गांधी का कहना है कि विपक्ष पूरी ताकत के साथ इस बिल का समर्थन करेगा और तब यह साफ हो जाएगा कि वास्तव में महिला विरोधी कौन है।
विपक्षी खेमे में इस बिल के गिरने को लोकतंत्र की जीत के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक इंडिया गठबंधन के नेताओं ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखने और देश भर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की मंशा को उजागर करने की रणनीति बनाई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार आरक्षण की आड़ में देश का राजनीतिक नक्शा बदलना चाहती थी, जिसे एकता के साथ विफल कर दिया गया है। प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि 2011 की जनगणना और परिसीमन की शर्तों के जरिए महिलाओं को गुमराह करने का प्रयास अब खत्म हो चुका है और आरक्षण इस देश की महिलाओं का अधिकार है जिसे छीनना मुमकिन नहीं है।
शुक्रवार को सदन के भीतर हुआ घटनाक्रम बेहद नाटकीय रहा। 21 घंटे की मैराथन चर्चा के बाद हुई वोटिंग में सरकार जरूरी दो तिहाई बहुमत जुटाने में नाकाम रही। सदन में मौजूद 528 सांसदों में से केवल 298 ने पक्ष में मतदान किया, जबकि 230 वोट विरोध में पड़े। बिल को पारित करने के लिए 352 वोटों की दरकार थी, लेकिन यह आंकड़ा 54 वोटों से पीछे रह गया। इस हार के बाद जहां सत्ता पक्ष बैकफुट पर है, वहीं विपक्ष इसे राष्ट्रहित में उठाया गया कर्तव्य बता रहा है। फिलहाल सबकी नजरें प्रियंका गांधी की होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।