खुशी के साथ आई आफत: चारामा में 12 घंटे से भारी बारिश, किसानों के चेहरे खिले तो एनएच-30 के व्यापारियों के लिए बनी मुसीबत

अनूप वर्मा, चारामा जनधारा संवाददाता
चारामा।
​चारामा क्षेत्र में बीते 12 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। इस झमाझम बारिश से जहां महीनों से जारी भीषण गर्मी और उमस पूरी तरह खत्म हो गई है, वहीं तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। क्षेत्र का पारा गिरकर 25 से 26 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और हवाओं में घुली ठंडक ने आम आदमी को बड़ी राहत दी है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले तीन से चार दिनों तक लगातार बारिश होने की प्रबल संभावना है।


​इस मानसूनी बारिश से इलाके के नदी-नाले और खेत लबालब हो चुके हैं, जिससे कृषि गतिविधियों और खेती-किसानी के कामों में जबरदस्त तेजी आ गई है। आम जनता और अन्नदाताओं के लिए जहां यह बारिश खुशियां लेकर आई है, वहीं नेशनल हाईवे-30 के किनारे रहने वाले रहवासियों और व्यापारियों के लिए एक बार फिर यह बड़ी आफत साबित हो रही है।
​इंजीनियरों की ‘गलत नीति’ का खामियाजा: 10 साल से भुगत रहे हैं सजा
​सड़क पर खुशी के साथ आई इस मुसीबत का सबसे बड़ा कारण आज से 10 वर्ष पहले नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के दौरान की गई तकनीकी लापरवाही है। एनएच विभाग के इंजीनियरों, अधिकारियों और कर्मचारियों की गलत टेक्सचर व त्रुटिपूर्ण निर्माण नीति के चलते नालियों का ढलान पूरी तरह उल्टा बना दिया गया।
​जिस नाली के माध्यम से शहर का गंदा पानी और बारिश का पानी शहर से बाहर जाना चाहिए था, उसका ढलान बाहर के बजाय शहर के अंदर की तरफ कर दिया गया। नतीजा यह है कि जब भी ऐसी तेज बारिश होती है, पूरे शहर का पानी और बारिश का जलस्तर हाईवे पर आकर जमा हो जाता है और देखते ही देखते नेशनल हाईवे-30 एक बड़े तालाब में तब्दील हो जाता है।
​घरों-दुकानों में घुस रहा नाली का गंदा पानी और जहरीले जीव-जंतु, रातों की नींद उड़ी
​हाईवे पर एक से दो फीट तक पानी लबालब भर जाने के कारण नाली की निकासी पूरी तरह ठप हो जाती है और नालियां ओवरफ्लो होने लगती हैं। इससे स्थिति बेहद नारकीय और भयावह हो जाती है:
​व्यापार ठप, भारी गंदगी: नालियों का सड़ा हुआ गंदा पानी और गाद (मलबा) सीधे व्यापारियों की दुकानों और घरों के भीतर घुस रहा है। बारिश थमने के बाद भी दो-दो, तीन-तीन दिनों तक दुकानों के सामने भारी गंदगी और बदबूदार पानी जमा रहता है, जिससे व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो चुका है।
​सांप-बिच्छुओं का पहरा: नाली ओवरफ्लो होने से उसमें रहने वाले जहरीले जीव-जंतु और सांप-बिच्छू बाहर निकलकर लोगों के घरों और दुकानों में घुस रहे हैं।
​रात भर रतजगा करने को मजबूर: अपनी जान और माल की सुरक्षा के लिए व्यापारी और उनके परिवार रात-रात भर जागकर लाठी-टॉर्च के साए में वक्त काटने को मजबूर हैं।
​10 साल से मीडिया और जनप्रतिनिधि दे रहे चेतावनी, प्रशासन पूरी तरह लापरवाह
​यह समस्या कोई नई या एक-दो साल की नहीं है। बीते 10 वर्षों से लगातार स्थानीय व्यापारियों, सजग मीडिया माध्यमों, स्थानीय नेताओं और क्षेत्र के विधायक द्वारा बार-बार शासन-प्रशासन और नेशनल हाईवे अथॉरिटी को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया जा रहा है। लेकिन एनएच विभाग और स्थानीय प्रशासन इस कदर लापरवाह और संवेदनहीन हो चुका है कि आज तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इंजीनियरों और अधिकारियों की इस घोर लापरवाही का खामियाजा आज पूरा नगर और व्यापारी वर्ग भुगत रहा है, जिससे नेशनल हाईवे पर आवागमन भी पूरी तरह बाधित हो जाता है।
​व्यापारियों का सब्र टूटा, अब उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
​स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि यह समस्या अब जीवन पर्यंत की बन चुकी है, क्योंकि जब तक इस नाली का पूरी तरह से स्थाई तकनीकी समाधान (ढलान दुरुस्त करना) नहीं निकाला जाएगा, तब तक राहत मिलना मुमकिन नहीं है।
​प्रशासनिक उदासीनता और हर साल होने वाले इस भारी नुकसान से तंग आकर अब चारामा के व्यापारियों का सब्र पूरी तरह टूट चुका है। व्यापारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस बार नेशनल हाईवे विभाग और प्रशासन ने तुरंत कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे चक्काजाम और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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