पंडवानी स्वर कोकिला तीजन बाई पंचतत्व में विलीन; राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

तीजन बाई निधन : दुर्ग। पद्म विभूषण, पद्मभूषण और पद्मश्री से सम्मानित देश की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई रविवार दोपहर पंचतत्व में विलीन हो गईं। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित उनके गृहग्राम गनियारी के मुक्तिधाम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। डॉ. तीजन बाई को उनके मंझले बेटे दिलहरण पारधी ने मुखाग्नि दी। उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार, उन्हें सुहागिन के रूप में अंतिम विदाई दी गई।

‘चोला माटी के हे राम…’ गीत से नम हुईं आंखें

अंतिम संस्कार के दौरान वहां मौजूद हजारों प्रशंसकों, लोक कलाकारों और शिष्यों ने तीजन बाई का प्रसिद्ध गीत “चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा…” गाकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पूरा माहौल गमगीन हो गया।

दिग्गज हस्तियों ने किए अंतिम दर्शन

तीजन बाई को अंतिम विदाई देने के लिए राजनीति और कला जगत की कई बड़ी हस्तियां गनियारी पहुंचीं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पद्मश्री उषा बारले सहित कई जनप्रतिनिधि और कलाकार शामिल हुए।

पीएम मोदी ने जताया शोक

डॉ. तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई बड़े राजनेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा:

“सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”

संघर्षों से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

एक बेहद साधारण परिवार में जन्मीं तीजन बाई ने बचपन से ही पंडवानी के प्रति अपने अटूट जुनून के दम पर पूरी दुनिया में एक अमिट पहचान बनाई। उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और कपालिक शैली की पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गौरव दिलाया। उनका जाना कला जगत के एक सुनहरे युग का अंत है।

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