बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी के प्रकोप के बीच बिलासपुर के मस्तूरी क्षेत्र में आग ने भयानक तबाही मचाई है। जोंधरा चौक के पास स्थित एक आरा मिल के पीछे बंद पड़े मकान में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के नौ रिहायशी मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और रिहायशी इलाके में अफरा-तफरी के साथ दहशत का माहौल बन गया। गनीमत यह रही कि आग की लपटें घर के भीतर तक पहुंचने से पहले ही स्थानीय निवासियों ने समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली वरना कोई बड़ी जनहानि हो सकती थी। इस अग्निकांड ने घनी आबादी वाले क्षेत्रों और औद्योगिक इकाइयों के पास अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
शॉर्ट सर्किट ने मचाई तबाही और लाखों की संपत्ति जलकर खाक
प्रारंभिक जांच में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है जिसने बंद मकान के भीतर सूखे कचरे और लकड़ी के सामान को तुरंत पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि कच्ची दीवारों और लकड़ी की पुरानी छतों के कारण लपटें एक घर से दूसरे घर तक बिजली की गति से पहुंच गईं जिससे स्थिति बेकाबू हो गई। इस भीषण अग्निकांड में पीड़ितों के घरों में रखा अनाज, कपड़े, नकदी और फर्नीचर सहित लाखों रुपये का कीमती सामान पूरी तरह जलकर खाक हो गया है। मस्तूरी पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और अब प्रशासनिक स्तर पर हुए नुकसान का सटीक आकलन किया जा रहा है ताकि प्रभावित परिवारों को उचित सहायता दी जा सके।
रिहायशी इलाकों में आरा मिलों की मौजूदगी बनी बड़ा खतरा
स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद भारी आक्रोश है क्योंकि आरा मिलों के आसपास बड़ी मात्रा में लकड़ी का बुरादा और सूखा कचरा जमा रहता है जो गर्मी के दिनों में बारूद की तरह काम करता है। मस्तूरी की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी वक्त पूरे मोहल्ले को श्मशान में बदल सकती है। फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बंद मकान में बिजली का कनेक्शन किस स्थिति में था। प्रशासन ने भी सभी उपखंडों को निर्देश जारी किए हैं कि गर्मी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अग्नि सुरक्षा ऑडिट में कोई ढिलाई न बरती जाए।