भानुप्रतापपुर। टेट की अनिवार्यता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का जो निर्णय आया है उससे उत्पन्न अनिश्चितता की परिस्थिति को लेकर शिक्षक संघ पीड़ा और चिंता व्यक्त करता है , शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष संजय सिंह ठाकुर , प्रमुख संगठन मंत्री ओंकार सिंह,कार्यकारी प्रांताध्यक्ष उमेश भारती गोस्वामी , महामंत्री मनोज कुमार राय , जिलाध्यक्ष टिकेश ठाकुर ने बताया कि इस निर्णय से देश भर के अनुमानित 20 लाख शिक्षक तथा प्रदेश लगभग एक लाख शिक्षकों का भविष्य ऊहापोह के अंधकार में डूब गया है। दरअसल 2010 के पहले अर्थात शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के पहले नियुक्त लाखों शिक्षकों की। ततस्थानी सेवा शर्तों को बदलने का यह मामला है जो शासन के किसी अन्य सेवा में नहीं देखा गया है। शिक्षा के अधिकार अधिनियम लागू होने के पूर्व जिन सेवा शर्तों और नियमों के आधार नियुक्ति हुई उसे पश्चातवर्ती नियम कानून से बाँध कर सभी के लिए टेट की अनिवार्यता करना शिक्षकों को भयग्रस्त करने जैसा है । शिक्षक संघ अपने सदस्यों से , अन्य संगठन ,अनेक राज्य शासन ने टेट की अनिवार्यता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में रिट पिटीशन भी दायर किया लेकिन 29 मई के निर्णय ने एक बार फिर से शिक्षकों के भविष्य का निर्णय केंद्र सरकार के पाले में डाल दिया है। अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ और छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस मानसून सत्र में इन शिक्षकों को राहत प्रदान करने के लिए ,उनके परिवारों को आर्थिक संरक्षण प्रदान के लिए , शिक्षकों में व्याप्त अनिश्चितता के निवारण के लिए कोई उपाय करे ,आगामी मानसून सत्र में एक अध्यादेश लाकर शिक्षकों के साथ प्रतिबद्धता दिखाये। अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ और छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ संवेदनशील सरकार से अपील किया है कि नौनिहालों में ज्ञान पुंज बिखेरने वाले ,विकसित भारत की परिकल्पना को साकार रूप देने वाले शिक्षकों के पक्ष में मानवीय और प्रशासकीय आधार पर निर्णय लेकर आचार्यवीरों को राहत देगी और यह परिस्थिति कतई उत्पन्न होने नहीं देगी कि पीड़ित शिक्षक अपने न्यायोचित सुरक्षा के लिए ,पेट पसीने और परिवार के लिए सड़क पर आकर संघर्ष करना पड़े। शिक्षक संघ ने सभी शिक्षकों से भी आग्रह किया है एकता में निहित शक्ति होती है अतः एकजुट रहें।
टेट मामले में केंद्र सरकार अध्यादेश लाए,शिक्षक संघ की मांग
02
Jun