संसद विशेष सत्र 2026: महिला आरक्षण और परिसीमन सहित तीन महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पेश

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा बुलाए गए संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र की कार्यवाही गुरुवार, 16 अप्रैल से शुरू हो गई। सत्र के पहले दिन कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में तीन प्रमुख विधेयक पेश किए, जिनमें संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य इन विधेयकों के माध्यम से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द लागू करना है।

सदन में तीखी बहस, अमित शाह का अखिलेश यादव को जवाब

विधेयकों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बीच तीखी बहस देखने को मिली। अखिलेश यादव ने मांग की कि बिल पेश करने से पहले जाति जनगणना कराई जाए। इस पर जवाब देते हुए अमित शाह ने स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है और हमारा संविधान इसकी अनुमति नहीं देता। उन्होंने यह भी कहा कि जनगणना के संबंध में निर्णय पहले ही लिया जा चुका है।

विपक्ष ने उठाए संवैधानिक सवाल

कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इन बदलावों को असंवैधानिक बताया। उन्होंने तर्क दिया कि जब महिला आरक्षण कानून पहले ही पारित हो चुका था, तो इसमें नए संशोधनों और परिसीमन आयोग के गठन की क्या आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री का संबोधन आज संभव

सत्र की गहमागहमी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुरुवार दोपहर 3 बजे लोकसभा को संबोधित करने की संभावना है। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में संशोधित महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए अलग से विधेयक पेश किया। मंगलवार को ही सरकार ने सांसदों को इन विधेयकों के ड्राफ्ट सौंप दिए थे, जो मुख्य रूप से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के प्रभावी क्रियान्वयन और नए परिसीमन से जुड़े हैं।

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