सूरजपुर। जिला मुख्यालय के महुआ पारा क्षेत्र में शासकीय भूमि और आम रास्ते पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि सरकारी रास्ते की भूमि पर एक विशाल भवन का निर्माण कर लिया गया, लेकिन शिकायतों और न्यायालय के निर्देशों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
मामले को लेकर शिकायतकर्ता कुंजबिहारी गुप्ता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दस्तावेजों के साथ यह दावा किया कि महुआ पारा में जिस भूमि पर निर्माण किया गया है, वह शासकीय मद की भूमि और आम रास्ते का हिस्सा है। शिकायत में अवैध निर्माण को हटाने और संबंधित पक्षों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने सूरजपुर तहसील कार्यालय को मौका जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। विवादित निर्माण अब भी खड़ा है और प्रशासनिक कार्रवाई केवल फाइलों तक सीमित नजर आ रही है।
शिकायतकर्ता कुंजबिहारी गुप्ता का कहना है कि उन्होंने कई बार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। उनका आरोप है कि मामले को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। वहीं स्थानीय नागरिकों के बीच भी यह चर्चा तेज है कि आखिर किसके संरक्षण में यह निर्माण अब तक बचा हुआ है।
जब इस संबंध में तहसील प्रशासन से सवाल किए गए तो अधिकारियों ने कहा कि उच्च न्यायालय का आदेश प्राप्त हो चुका है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, कार्रवाई की समय-सीमा या अब तक हुई प्रगति को लेकर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। यही वजह है कि प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी आम रास्तों और शासकीय भूमि पर कब्जे के मामलों में भी न्यायालय के निर्देशों के बाद कार्रवाई नहीं होती, तो आम नागरिकों का कानून और प्रशासन से भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है। लोगों का यह भी मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में ऐसे मामलों को बढ़ावा मिल सकता है।
फिलहाल पूरा मामला सूरजपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आखिर कब सक्रिय होता है और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप अवैध निर्माण पर कार्रवाई कर कानून का पालन सुनिश्चित करता है।