दंतेवाड़ा : जिले के पंडेवार क्षेत्र में पकड़े गए अवैध लौह अयस्क परिवहन मामले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी में जिस लौह अयस्क को रूंगटा कंपनी के लीज एरिया से चोरी कर निकाला जाना बताया गया था, अब उसी मामले की जांच की दिशा बदलती नजर आ रही है। दो ट्रक और एक जेसीबी पकड़े जाने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध उत्खनन रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र के भीतर हुआ था, लेकिन अब मामले को राजस्व भूमि से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि जमीन की प्रकृति बदलकर दिखाई गई तो बड़ी कार्रवाई से बचाने का रास्ता खुल सकता है। यही वजह है कि पूरे मामले में वन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
फिलहाल मामले की जांच बचेली रेंज कार्यालय द्वारा की जा रही है। वन विभाग की टीम मौके की जमीन, उत्खनन स्थल और लौह अयस्क परिवहन से जुड़े तथ्यों की जांच में जुटी हुई है। हालांकि घटना के चार दिन बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पकड़े गए वाहनों पर राजसात की कार्रवाई होगी या सिर्फ जुर्माना लगाकर मामला शांत कर दिया जाएगा।
जानकारों के मुताबिक यदि अवैध परिवहन और उत्खनन रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में साबित होता है, तो वन अधिनियम के तहत ट्रकों और मशीनों को राजसात करने का प्रावधान है। यदि मामला राजस्व भूमि का पाया जाता है, तो कार्रवाई सीमित होकर आर्थिक दंड और खनिज विभागीय प्रक्रिया तक सिमट सकती है। इसी अंतर को लेकर अब पूरे मामले में संदेह और चर्चाएं तेज हो गई हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच केवल वाहनों तक सीमित न रहे, बल्कि रूंगटा लीज एरिया से जुड़े पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जिले में लंबे समय से लौह अयस्क चोरी और अवैध परिवहन का संगठित खेल चल रहा है, जिस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से माफियाओं के हौसले बढ़ते जा रहे हैं।
मामले में डीएफओ का कहना है कि जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में संबंधित क्षेत्र राजस्व भूमि पाया जाता है तो प्रकरण खनिज विभाग को सौंपा जा सकता है, जबकि वन भूमि साबित होने पर वन अधिनियम के तहत राजसात सहित कड़ी कार्रवाई की जाएगी।