दवा के बड़े बैच में मिली बड़ी खराबी, डॉ. रेड्डीज ने उठाया यह कड़ा कदम!

नई दिल्ली। देश की बड़ी दवा कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। कंपनी ने अपनी बेहद जरूरी और प्रमुख दवा सेमाग्लूटाइड की बाजार में होने वाली सप्लाई को अचानक रोक दिया है। एम्के रिसर्च की एक नई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि दवा के एक बहुत बड़े हिस्से में जांच के दौरान खराबी मिली है। इसके बाद कंपनी ने तुरंत यह बड़ा फैसला लिया है।

गुणवत्ता जांच में फेल हुआ दवा का बड़ा हिस्सा

रिपोर्ट के अनुसार दवा बनाने की शुरुआती रासायनिक प्रक्रिया में आई गड़बड़ी के कारण यह समस्या खड़ी हुई है। साधारण शब्दों में कहें तो दवा तैयार करने के दौरान जो छोटे-छोटे तत्वों को आपस में जोड़ा जाता है, उस प्रक्रिया में कुछ कमियां रह गईं। इसके चलते पूरी दवा में अनचाही मिलावट या अशुद्धि आ गई। दवा की शुद्धता तय मानकों पर सही नहीं पाई गई। यही वजह है कि कंपनी अब इस खराबी की असली वजह तलाशने में जुटी है। इस पूरी जांच में अभी कुछ हफ्तों का समय लग सकता है।

कमाई और बाजार की सप्लाई पर पड़ेगा सीधा असर

इस रुकावट की वजह से कंपनी को आने वाले दिनों में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए दवा की कुल मात्रा के लक्ष्य को कम कर दिया है। पहले बाजार में 10 से 12 मिलियन दवा वाले पेन भेजने की योजना थी। लेकिन अब इसे घटाकर 8 मिलियन कर दिया गया है। कंपनी को भरोसा है कि दोबारा से जांच और पूरी प्रक्रिया को परखने का काम सितंबर 2026 तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद नवंबर 2026 से बाजार में दवा की सप्लाई फिर से शुरू होने की उम्मीद है।

रेटिंग में गिरावट और शेयर बाजार का हाल

इस पूरी घटना के बाद ब्रोकरेज फर्म एम्के रिसर्च ने डॉ. रेड्डीज की साल 2027 की अनुमानित कमाई में 7 प्रतिशत की बड़ी कटौती कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने इस शेयर को बेचने या कम रखने की सलाह दी है। इसके लिए उन्होंने 1300 रुपये का एक लक्ष्य भी तय किया है। वैसे भी पिछले 1 साल के दौरान इस कंपनी के शेयरों में कोई खास बढ़त नहीं देखी गई है, जबकि बाजार के दूसरे शेयर काफी आगे निकल गए हैं।

निवेशकों पर होने वाला असर और कुछ राहत की बातें

इस खराबी की वजह से प्रभावित हुए दवा के पूरे स्टॉक की कीमत अब शून्य हो जाएगी। इससे कंपनी के बही-खाते पर असर पड़ेगा। इसके अलावा कंपनी अब दवा की सामग्री के लिए किसी दूसरे सप्लायर यानी विक्रेता की तलाश में है, जिसमें कम से कम 1 साल का वक्त लग सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि मुंह से खाई जाने वाली गोलियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उन्हें बनाने का तरीका और सामग्री बिल्कुल अलग है। इसके साथ ही मौजूदा समझौतों के तहत कंपनी पर किसी तरह का जुर्माना लगने की आशंका भी नहीं है।

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