मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार के एक ताजा बयान और उनकी कुछ गुप्त मुलाकातों ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार की तरफ से हाल ही में लाई गई किसान कर्जमाफी योजना में हुए बड़े बदलावों की खुलकर तारीफ की है। इतना ही नहीं उन्होंने इस जनहित के फैसले के लिए राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का विशेष रूप से धन्यवाद भी किया है। उनके इस बदले हुए रुख के बाद से ही कयासों का बाजार बेहद गर्म हो गया है।
बंद कमरे में हुई मुलाकात से शुरू हुआ सस्पेंस
दरअसल इस पूरे मामले और अटकलों को हवा तब मिली जब बीते 8 जुलाई को मुंबई स्थित विधानभवन में महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच चल रहे पुराने सीमा विवाद को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक के ठीक बाद शरद पवार अचानक राज्य के डिप्टी सीएम के कमरे में पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी पार्टी के कई विधायकों के साथ काफी देर तक गुप्त चर्चा की। इस सीक्रेट मीटिंग की खबर जैसे ही बाहर आई वैसे ही विपक्ष के खेमे में खलबली मच गई। कयास लगाए जाने लगे कि क्या शरद पवार की पार्टी एनडीए यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होने जा रही है या फिर इसका कांग्रेस में विलय होने वाला है।
पार्टी के बड़े नेताओं ने जताई तीखी असहमति
अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शरद पवार की पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस समय एनडीए में शामिल होने के बिल्कुल पक्ष में नहीं हैं। पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी बैठकों में कुछ बड़े नेताओं ने इस संभावित कदम को लेकर अपनी सख्त असहमति भी जता दी है। नेताओं का मानना है कि इस तरह का कोई भी फैसला पार्टी की मूल विचारधारा के खिलाफ होगा। इस आंतरिक विरोध के कारण पार्टी के भीतर एक बड़ा वैचारिक संकट खड़ा होता हुआ दिखाई दे रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष ने अफवाहों पर लगाया पूर्णविराम
पार्टी को लेकर बाजार में तैर रही इन तमाम चर्चाओं और अटकलों के बीच अब संगठन के बड़े पदाधिकारियों की तरफ से सफाई भी सामने आ गई है। एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने मीडिया से बातचीत करते हुए इन सभी खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी के एनडीए में जाने या किसी अन्य दल में विलय की बातें महज एक कोरी अफवाह हैं और इनमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से ऐसी खबरों पर ध्यान न देने की अपील की है।
क्या है वह योजना जिसकी शरद पवार ने की तारीफ
इस पूरी राजनीतिक उठापटक के केंद्र में महाराष्ट्र की नई कर्जमाफी योजना है। इस योजना के तहत सरकार ने उन नियमों में ढील दी है जो पहले छोटे और सीमांत किसानों को कर्जमाफी का लाभ लेने से रोकते थे। अब नए बदलावों के बाद राज्य के लाखों जरूरतमंद किसानों के बैंक खातों का पुराना कर्ज पूरी तरह साफ हो जाएगा। शरद पवार ने इसी किसान राहत नीति को राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री को दिया गया उनका यह धन्यवाद केवल किसानों के मुद्दे तक सीमित रहता है या इसके पीछे महाराष्ट्र की राजनीति की कोई नई पटकथा लिखी जा रही है।