कला के रंगों से पहचान बना रहे कोरिया जिले के युवा चित्रकार अरविंद नागवंशी
कोरिया। कोरिया जिले के सोनहत जनपद पंचायत के गांव बदरा में एक किसान परिवार में जन्मे 23 वर्षीय युवा चित्रकार अरविंद नागवंशी अपनी मेहनत, लगन और कला के प्रति समर्पण से एक अलग पहचान बना रहे हैं।
अरविंद बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें चित्रकला का विशेष शौक था। वे कभी घर की दीवारों पर, कभी जमीन पर और कभी अपनी कॉपी-किताबों में चित्र बनाकर घंटों अभ्यास किया करते थे। उस समय उन्हें चित्रकला की तकनीकी जानकारी तो नहीं थी, लेकिन उनके बनाए चित्रों की शिक्षकों और दोस्तों द्वारा लगातार सराहना की जाती थी। यही प्रशंसा उनके लिए प्रेरणा बन गई और उन्होंने कला को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा 12वीं तक लोयोला उच्च माध्यमिक विद्यालय, भैसवार से पूरी की। आगे चलकर वे फाइन आर्ट्स में उच्च शिक्षा लेकर बी.एफ.ए. करना चाहते थे, लेकिन परिवार की आर्थिक परिस्थितियाँ अनुकूल न होने के कारण उनका यह सपना उस समय पूरा नहीं हो सका।

हालांकि, अरविंद ने हार नहीं मानी। उन्होंने मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन चित्रकला सीखना शुरू किया। लगातार अभ्यास, नई तकनीकों का अध्ययन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने अपनी कला को निखारा। आज वे पिछले लगभग पाँच वर्षों से चित्रकला के क्षेत्र में सक्रिय हैं और लगातार नए प्रयोग करते हुए अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं।

अरविंद का कहना है कि कला सीखने की कोई उम्र नहीं होती। वे आज भी स्वयं को एक विद्यार्थी मानते हैं और भविष्य में नई-नई कलाओं को सीखकर अपनी प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाना चाहते हैं। उनका मानना है कि यदि जुनून सच्चा हो तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। ग्रामीण परिवेश से निकलकर अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर आगे बढ़ रहे अरविंद नागवंशी आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।
