नई दिल्ली। मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार में साफ दिखाई देने लगा है। समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल परिवहन फिर शुरू हो गया है और करीब दो महीने की रुकावट के बाद ईरान का कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों की ओर रवाना होने लगा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की राष्ट्रीय टैंकर कंपनी के दो बड़े वीएलसीसी (VLCC) सुपरटैंकर लाखों बैरल कच्चा तेल लेकर रवाना हुए हैं। जहाजों की गतिविधियों से जुड़े डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर यह पुष्टि की गई है कि हाल के हफ्तों में यह पहला बड़ा तेल निर्यात है। इसके अलावा एक अन्य टैंकर भी लगभग 10 लाख बैरल तेल लेकर समुद्री मार्ग पर आगे बढ़ चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के बड़े हिस्से की तेल और गैस जरूरतें इसी समुद्री मार्ग से पूरी होती हैं। ऐसे में यहां सामान्य आवाजाही बहाल होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में राहत का माहौल बना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ समय से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहने वाले ब्रेंट क्रूड के दाम अब 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। वहीं मर्बन क्रूड की कीमतों में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि तेल की कीमतों में कमी से दुनिया भर में महंगाई का दबाव कम हो सकता है। भारत जैसे तेल आयातक देशों को भी इसका फायदा मिल सकता है, क्योंकि कच्चा तेल सस्ता होने से ईंधन लागत और आयात बिल पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।