गंगरैल की रंगीनियों से बढ़ी धड़कनें, हनी ट्रैप जांच में नए नामों की चर्चा
कृष्ण कुमार सिकंदर
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रैप कांड की दूसरी कड़ी अब छत्तीसगढ़ तक सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर रही है। रायपुर और धमतरी के गंगरैल गेस्ट हाउस में हुई कथित हाईप्रोफाइल महफिलों के बाद अब जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है रेशू उर्फ अभिलाषा। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि गंगरैल गेस्ट हाउस की कथित रंगीन पार्टियों में उसकी मौजूदगी थी या नहीं, लेकिन राजनीतिक गलियारों, प्रशासनिक अफसरों और कारोबारियों के बीच इस बात को लेकर बेचैनी बढ़ गई है कि कहीं वे भी इस पूरे जाल की जद में तो नहीं आने वाले। फिलहाल कई प्रभावशाली लोग “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपनाए हुए हैं, मगर उनके माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं।
इसी बीच, हनी ट्रैप पार्ट-2 की मुख्य किरदार बताई जा रही रेशू चौधरी की निजी जिंदगी से जुड़े कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने इस मामले को और अधिक पेचीदा बना दिया है। अब तक जिस महिला को अभिलाषा नाम से पहचाना जा रहा था, उसका वास्तविक नाम रेशू चौधरी बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक “अभिलाषा” नाम उसके भाई अभिलाष चौधरी से जुड़ा है, जो वर्तमान में पुलिस विभाग में सिपाही के पद पर पदस्थ है। रेशू के पिता भी पुलिस विभाग में थे और उनके निधन के बाद भाई को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। चर्चा है कि इसी पुलिस बैकग्राउंड और प्रभाव का इस्तेमाल रेशू ने अपने व्यक्तिगत विवादों और संबंधों में भी किया।
रेशू चौधरी की शादी 10 दिसंबर 2018 को रायपुर के शिवाजी पार्क मैरिज गार्डन में महेंद्र चौधरी के साथ हुई थी। शादी के कुछ महीनों बाद मार्च 2019 में वह अपने पति के साथ ओमान की राजधानी मस्कट चली गई थी। बताया जाता है कि वहीं से दोनों के रिश्तों में तनाव शुरू हुआ। हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल और आपसी विवादों के चलते महज तीन महीने बाद जून 2019 में रेशू भारत लौट आई। इसके बाद अगस्त 2019 में उसने सागर के महिला थाने में पति महेंद्र चौधरी, ससुर प्यारेलाल अहिरवार और सास गीता देवी के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया।
शिकायत में रेशू ने पति पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उसने दावा किया था कि मस्कट में रहने के दौरान उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया, शराब पीने के लिए मजबूर किया गया और उसे कमरे में बंद रखकर मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उसने जान से मारने की धमकी देने तक के आरोप लगाए थे। दूसरी ओर ससुराल पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि रेशू की लाइफस्टाइल और व्यवहार के कारण वैवाहिक संबंध टूटे। उनका आरोप था कि वह मस्कट से नकदी और जेवर लेकर बिना बताए लौट आई थी।
इस विवाद के बाद रेशू सागर में राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गई और भाजपा के एससी मोर्चा से जुड़कर खुद को युवा नेत्री के रूप में स्थापित करने की कोशिश करने लगी। इसी दौरान उसका नेटवर्क तेजी से बढ़ा और अब उसका नाम कथित हनी ट्रैप नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है।
उधर, इंदौर क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम पूरे मामले की जांच बेहद गोपनीय तरीके से कर रही है। सूत्रों के अनुसार पुलिस के पास साक्ष्य जुटाने के लिए सीमित समय है और जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से लेकर वित्तीय लेन-देन तक की पड़ताल में जुटी हुई हैं। अब तक इस मामले में सात लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कई अन्य नाम भी जांच एजेंसियों के रडार पर बताए जा रहे हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बेचैनी भी बढ़ती जा रही है।