दंतेवाड़ा। जिले में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के पोषण के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना अब ठगी का अड्डा बन गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, करीब 60 लाख की राशि फर्जी हितग्राहियों के नाम पर निकाल ली गई है। प्रारंभिक जांच में 1400 से ज्यादा फर्जी पंजीयनों का खुलासा हुआ है, जिससे पूरे महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया है।
जांच के अनुसार, विभाग की आधिकारिक आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग कर पोर्टल पर फर्जी एंट्री की गईं। इन फर्जी हितग्राहियों के नाम पर स्वीकृत राशि को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करके निकाल लिया गया। सूत्र बताते हैं कि लंबे समय से यह गड़बड़ी चल रही थी। पोर्टल में फर्जी बैंक खाते जोड़कर भुगतान की प्रक्रिया को लगातार अंजाम दिया जा रहा था। मामला सामने आने के बाद संबंधित आईडी को तुरंत ब्लॉक कर दिया गया है। अब साइबर सेल की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि विभागीय लॉगिन डिटेल्स बाहर तक कैसे पहुंचीं। जांच एजेंसियां इस पूरे सिलसिले में विभाग में तैनात एक बाबू की भूमिका पर विशेष नजर रखे हुए हैं। योजना से जुड़े दस्तावेजों, पोर्टल संचालन और हितग्राहियों के सत्यापन की जिम्मेदारी रखने वाले कर्मचारियों से भी पूछताछ होने की संभावना है।
जांच का दायरा बालूद, चंपसारा, बंगापाल, गाटम और कटेकल्याण जैसे क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंच गया है। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और जल्द ही इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की तैयारी चल रही है। कलेक्टर ने कहा कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि वर्ष 2025-26 के दौरान योजना के क्रियान्वयन को लेकर लगातार शिकायतें आ रही थीं, लेकिन समय पर कार्रवाई न होने के कारण गड़बड़ी का सिलसिला बढ़ता गया। एक ऐसी योजना, जो गरीब गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए बनाई गई थी, अब फर्जी पंजीयनों और साइबर ठगी का शिकार हो गई है। इससे न सिर्फ असली हितग्राहियों को नुकसान पहुंचा है, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।