साल भर से पेंशन को तरस रहे दिव्यांग और विधवाएं, क्या फाइलों में दफन हो गई गरीबों की ‘सुख-सहारा’?

​चारामा
​सरकारे दावा करती हैं कि अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँच रहा है, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 10 से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करती है। यहाँ 37 वर्षीय दिव्यांग गैदी सोनकर, जिनके दोनों पैर काम नहीं करते और जिनके माता-पिता भी इस दुनिया में नहीं हैं, पिछले मार्च 2025 से एक-एक पैसे के लिए मोहताज हैं।
​पेंशन नहीं, परेशानियों की मार
​नगर में गैदी सोनकर जैसे कुल 12 ऐसे हितग्राही हैं जिन्हें बीते एक साल से पेंशन की राशि नसीब नहीं हुई है। पहले यह पैसा नगर पंचायत के माध्यम से खातों में आता था, लेकिन अब यह पैसा नगर पंचायत की बाजार सीधे राज्य सरकार और केंद्र सरकार के द्वारा इनके खातों में डाला जाता है, जहाँ तकनीकी पेचो (KYC या दस्तावेज) बताकर राज्य की और से ही इनका पेंशन उन्हें नहीं मिल रहा हैं.
​हितग्राहियों का पक्ष: पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने बैंकों में केवाईसी और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर ली है, फिर भी पैसा उनके खातों तक नहीं पहुँच रहा।
​सवाल यह हैं की अगर दस्तावेज पूरे हैं, तो सिस्टम की सुस्ती का खामियाजा ये गरीब क्यों भुगतें?

​परिवार सहायता योजना: 4 साल का इंतजार, फिर भी हाथ खाली
​पेंशन के अलावा एक और गंभीर मामला ‘राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना’ का है। नियम के मुताबिक, परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य की मृत्यु पर शासन द्वारा ₹20,000 की आर्थिक मदद दी जाती है।
​लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि बीते 2-3 वर्षों से अधिकतर परिवारों को यह राशि नहीं मिली है।
​कई ऐसे मामले हैं जहाँ मुखिया की मृत्यु हुए 4 साल बीत चुके हैं, फॉर्म भरे जा चुके हैं, लेकिन सहायता राशि का आज तक पता नहीं है।

​गैदी सोनकर जैसे दिव्यांगों के लिए यह पेंशन केवल पैसा नहीं, बल्कि उनके जीने का एकमात्र सहारा है। जब शासन की योजनाएं फाइलों और बैंक के सर्वरों के बीच फंस जाती हैं, तो सबसे पहले उन गरीबों का चूल्हा बुझता है जिनके पास आय का कोई दूसरा स्रोत नहीं है।
​मुख्य सवाल जो प्रशासन के कार्यवाही पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर्ता हैं की
​जब हितग्राही दावा कर रहे हैं कि केवाईसी पूर्ण है, तो पैसा कहाँ अटका है?
​परिवार सहायता योजना की राशि का आवंटन पिछले 3 सालों से लंबित क्यों है?
​क्या नगर पंचायत प्रशासन ने इन 12 हितग्राहियों की समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया है?
इस संबंध में नगर पंचायत की पेंशन शाखा के अधिकारी से पूछने पर उन्होंने बताया कि जिन हिट गायों को पेंशन प्राप्त नहीं हो रहा है उनके दस्तावेज कई बार राज्य सरकार को भेजे जा चुके हैं लेकिन कहीं ना कहीं कुछ तकनीकी समस्याएं आने के कारण इनका पैसा नहीं जा पा रहा है, जिसके लिए प्रयास किया जा रहे हैं। वही परिवार सहायता व अन्य पेंशनों के फॉर्म समय पर संबंधित विभाग में भेज दिए जाते हैं, उसके बाद सारी प्रक्रिया राज्य सरकार की ओर से होती है।

वही सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर इन गरीबों की चप्पलें घिस चुकी हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन गैदी  सोनकर और उनके जैसे अन्य पीड़ितों की सुध लेता है या ये फाइलें धूल खाती रहेंगी।

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