अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल को लेकर आई एक नई किताब ने दुनिया भर की राजनीति में खलबली मचा दी है। तेईस जून को बाजार में आई इस किताब का नाम रेजीम चेंज है। इस किताब में दावा किया गया है कि यूक्रेन युद्ध को रोकने की रणनीति पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच पर्दे के पीछे भारी मतभेद थे। किताब के मुताबिक ट्रंप के शपथ लेने के महज दस दिन बाद तीस जनवरी दो हजार पच्चीस को ओवल ऑफिस यानी अमेरिकी राष्ट्रपति के मुख्य दफ्तर में एक बहुत बड़ी बैठक हुई थी। इस बैठक में दोनों के विचार बिल्कुल अलग नजर आए।

वेंस को था नाटो सेना पर ऐतराज, भारत और सऊदी अरब का सुझाया था नाम
किताब में लिखा है कि इस बैठक में यूक्रेन और रूस के बीच युद्धविराम यानी लड़ाई को तुरंत रोकने के लिए एक योजना पर चर्चा हो रही थी। योजना में यह सुझाव था कि युद्ध रोकने के बाद वहां निगरानी के लिए फ्रांस और ब्रिटेन जैसे यूरोपीय देशों की सेना भेजी जाए। लेकिन उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को इस पर सख्त ऐतराज था। वह नाटो यानी पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन की सेना को वहां नहीं भेजना चाहते थे। वेंस का मानना था कि नाटो सेना को देखकर रूस और भड़क जाएगा और अमेरिका भी इस युद्ध में सीधा खिंच जाएगा। इसलिए वेंस ने भारत या सऊदी अरब के सैनिकों को वहां शांति सेना के रूप में तैनात करने का अनोखा सुझाव दिया।
जेलेंस्की पर बरसे ट्रंप, पर्दे के पीछे किसी तीसरे पक्ष से चल रही है बात
जब जेडी वेंस ने भारत का नाम लिया, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हंसते हुए इस आइडिया को तुरंत खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके रिश्ते बहुत शानदार हैं और मोदी उन्हें बहुत पसंद करते हैं। लेकिन भारतीय लोग ऐसी चीजों के लिए कभी अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करेंगे। ट्रंप ने साफ किया कि अगर कोई और देश अपने खर्चे पर सेना भेजना चाहे तो उन्हें दिक्कत नहीं है, लेकिन अमेरिका का एक भी पैसा या सैनिक वहां नहीं जाएगा।
इसके अलावा बैठक में ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की भी कड़ी आलोचना की और यूक्रेन को सबसे भ्रष्ट देश बताया। किताब में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि ट्रंप ने अपनी टीम को रूस से सीधे बात करने से मना किया है क्योंकि वे खुद पर्दे के पीछे से किसी गुप्त रास्ते यानी तीसरे पक्ष के जरिए रूस के साथ डील तय करने में जुटे हैं। हालांकि व्हाइट हाउस ने अभी तक इस पर कोई बयान नहीं दिया है।