महतारी वंदन योजना पर बड़ा अपडेट: 30 जून तक ई-केवाईसी नहीं कराई तो अटक जाएगी अगली किस्त

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लाखों महिलाओं के लिए संचालित ‘महतारी वंदन योजना’ को लेकर एक बेहद जरूरी खबर सामने आई है। योजना के तहत मिलने वाली ₹1,000 की मासिक सहायता राशि की निरंतरता बनाए रखने के लिए सरकार ने ई-केवाईसी (e-KYC) कराना अनिवार्य कर दिया है। जिन महिलाओं ने अब तक अपना सत्यापन पूरा नहीं कराया है, उनके पास 30 जून 2026 तक का आखिरी मौका है। इस तय समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी न होने पर अगली किस्त रोकी जा सकती है।

20 हजार से ज्यादा महिलाओं का सत्यापन अब भी बकाया
महिला एवं बाल विकास विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, अकेले महासमुंद जिले में ही करीब 3 लाख 18 हजार लाभार्थी महिलाओं में से 2 लाख 98 हजार का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। हालांकि, 20 हजार 116 महिलाएं अब भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी टिकवेंद्र जाटवार ने बताया कि योजना में पारदर्शिता लाने और केवल वास्तविक पात्र महिलाओं तक लाभ पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। कई मामलों में महिलाएं रोजगार के सिलसिले में दूसरे राज्यों में पलायन कर चुकी हैं या फिर बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान उनके अंगूठे का निशान (Thumbprint) मशीन से मैच नहीं हो रहा है। ऐसे सभी मामलों का एक अलग डेटा तैयार कर शासन को भेजा जा रहा है।

सूची से हटाए जा रहे मृत हितग्राहियों के नाम
इस महा-सत्यापन अभियान के दौरान कई ऐसे मामले भी उजागर हुए हैं, जहां योजना का लाभ ले रहीं महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है। विभाग अब ऐसी मृत हितग्राहियों के नाम एक्टिव लिस्ट से हटाने की कार्रवाई कर रहा है। आपको बता दें कि साल 2024 में जब यह योजना शुरू हुई थी, तब जिले में लाभार्थियों की संख्या करीब 3 लाख 25 हजार थी, जो अब स्क्रूटनी और सुधार के बाद घटकर 3 लाख 18 हजार रह गई है।

बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए घर पहुंचेगी टीम
बायोमेट्रिक मिसमैच, वृद्धावस्था या दिव्यांगता के कारण जो महिलाएं चॉइस सेंटर या आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचने में असमर्थ हैं, उनके लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजरों की एक संयुक्त टीम बनाई है। यह टीम लंबित सूची के आधार पर ऐसी महिलाओं के घर-घर जाकर उनका भौतिक और डिजिटल सत्यापन कर रही है।

क्यों अनिवार्य है ई-केवाईसी और कैसे कराएं?
सरकार इस प्रक्रिया के जरिए डीबीटी (Direct Benefit Transfer) को पूरी तरह फुलप्रूफ बनाना चाहती है ताकि बिचौलियों और फर्जीवाड़े पर लगाम लग सके।

कहाँ जाएं: हितग्राही महिलाएं अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र, चॉइस सेंटर (CSC) या लोक सेवा केंद्र में जाकर इसे पूरा करा सकती हैं।

जरूरी दस्तावेज: इसके लिए लाभार्थी को अपना आधार कार्ड और आधार से लिंक एक्टिव मोबाइल नंबर साथ ले जाना होगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है।

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