2 लाख करोड़ का निवेश और 45 गीगावाट का लक्ष्य: बिजली संकट दूर करने के लिए गौतम अडानी ने पेश किया 5 साल का रोडमैप

नई दिल्ली। भारत में जिस रफ्तार से फैक्ट्रियां बढ़ रही हैं और गर्मी का पारा चढ़ रहा है, उसे भांपते हुए देश के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी ने पावर सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। बुधवार को अडानी ग्रुप की सालाना आम बैठक (AGM) में चेयरमैन गौतम अडानी ने एक ऐसे मेगा मास्टरप्लान का ऐलान किया, जिसने पूरे बिजनेस जगत में हलचल मचा दी है। अडानी पावर अगले 5 सालों के भीतर बिजली क्षेत्र में ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा का भारी-भरकम निवेश करने जा रही है। इस निवेश के दम पर कंपनी अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 45 गीगावाट (GW) तक पहुंचाएगी, जो किसी भी प्राइवेट प्लेयर का अब तक का सबसे बड़ा टार्गेट है।

परमाणु और हाइड्रो पावर में भी मचेगी खलबली, 2035 तक का बड़ा प्लान
अडानी ग्रुप सिर्फ पारंपरिक बिजली (थर्मल) तक ही सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि भविष्य की क्लीन एनर्जी को लेकर भी उन्होंने पत्ते खोल दिए हैं:

परमाणु ऊर्जा में एंट्री: ग्रुप ने ‘अडानी एटॉमिक एनर्जी’ के जरिए न्यूक्लियर पावर सेक्टर में कदम रख दिया है। इसके लिए बकायदा जमीन भी तय कर ली गई है। कंपनी का लक्ष्य साल 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु बिजली पैदा करने का है।

भूटान के साथ हाथ मिलाया: विदेशी जमीन पर भी पैर पसारते हुए अडानी ग्रुप ने भूटान की ‘ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन’ के साथ समझौता किया है। इसके तहत हिमालयी क्षेत्र में 5,000 मेगावाट के विशाल हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स (जल विद्युत) तैयार किए जाएंगे।

कहां से आएगा इतना पैसा? रिकॉर्ड मुनाफे ने दी ताकत
बाजार में अक्सर चर्चा होती है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए फंड कहां से आएगा? इसका जवाब अडानी ग्रुप की इस साल की बैलेंस शीट दे रही है। हाल ही में खत्म हुए वित्त वर्ष (FY26) में ग्रुप ने अपनी मजबूत वित्तीय सेहत का प्रदर्शन किया है:

कुल रेवेन्यू (कमाई): ₹2.92 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।

सालाना मुनाफा: टैक्स चुकाने के बाद कंपनी का नेट प्रॉफिट 13.9 फीसदी की छलांग लगाकर ₹46,376 करोड़ रहा।

कैश रिजर्व: वर्तमान में कंपनी के पास ₹67,995 करोड़ का मजबूत कैश फ्लो मौजूद है, जो किसी भी बड़े रिस्क को उठाने के लिए काफी है।

इस शानदार और ऐतिहासिक वित्तीय मजबूती के दम पर ही अडानी ग्रुप ने अकेले पिछले एक साल में ₹1.5 लाख करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) किया है, जो देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलने में मील का पत्थर साबित हो रहा है।

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