सूरजपुर जिले के राजस्व महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब जिला प्रशासन ने एक साथ 106 पटवारियों के तबादले का आदेश जारी कर दिया। कलेक्टर एस. जयवर्धन के निर्देश पर की गई इस बड़ी सर्जरी ने विभाग के भीतर वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों की जड़ों को हिला कर रख दिया है। प्रशासन का यह कड़ा फैसला उन पटवारियों पर भारी पड़ा है जो लंबे समय से एक ही ब्लॉक और तहसील में अपनी पकड़ बनाए हुए थे। इस फेरबदल को जिले के प्रशासनिक इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी और कड़क कार्रवाई माना जा रहा है जिससे पूरे दफ्तर में खलबली मची हुई है।
भ्रष्टाचार पर लगाम और कार्यप्रणाली में सुधार की कवायद
सूत्रों के अनुसार इस सामूहिक तबादले के पीछे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी की हालिया सक्रियता को मुख्य वजह माना जा रहा है। पिछले कुछ समय में राजस्व विभाग के कई कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप और एसीबी की कार्रवाई ने विभाग की छवि पर सवाल खड़े कर दिए थे। इसी छवि को सुधारने और कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए कलेक्टर ने यह सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन का मानना है कि कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव होने से भ्रष्टाचार के पुराने नेटवर्क टूटेंगे और आम जनता को अपने राजस्व संबंधी कार्यों के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
कलेक्टर की चेतावनी और नए क्षेत्रों में तैनाती के मायने
इस आदेश के जरिए कलेक्टर ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी 106 पटवारियों को तत्काल प्रभाव से नए ब्लॉकों में कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे। प्रशासन को उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक कदम से न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ निचले स्तर तक पहुंचेगा बल्कि लंबे समय से अटके हुए नामांतरण और सीमांकन जैसे मामलों में भी तेजी आएगी। जिले के हर कोने में इस तबादला सूची की चर्चा हो रही है और इसे सुशासन की दिशा में एक साहसी कदम के रूप में देखा जा रहा है।