Editor-in-Chief सुभाष मिश्र

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – गड़े मुर्दे उखाड़ने का समय

-सुभाष मिश्रइन दिनों अधिकांश राज्यों की सरकारों को लगता है कि मुर्दों से भी वोट वसूला जा सकता है। वे गड़े मुर्दे उखाडऩे में लगे हैं जो बात इतिहास में दफन है उसको उखाड़कर वोट मे...

Continue reading

आलोक चटर्जी रुके नहीं और न ही थके

आलोक चटर्जी रुके नहीं और न ही थके…

रंगकर्म की जबलपुर से शुरुआत और अंत भी यहीं पंकज स्वामी , जबलपुर,  रंगकर्मी आलोक चटर्जी के निधन की खबर सुबह से आभासी संसार और डिजीटल मीडिया में प्रसारित हो रही है। उनको जानने-पहचान...

Continue reading

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – एक बंगला बने न्यारा

-सुभाष मिश्रमुझे इस समय के राजनीतिक हालात को देखकर कुंदनलाल सहगल द्वारा 1937 में बनी फि़ल्म प्रेसीडेंट में गाया और फि़ल्माया गया गाना याद आ रहा है- एक बंगला बनें न्यारा, रहे क...

Continue reading

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – महाकुंभ 2025: नदियों की स्वच्छता का संकट और समाधान की ओर कदम

-सुभाष मिश्रप्रयागराज (इलाहाबाद) में जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित होने वाला महाकुंभ का इस बार एक विशाल आयोजन होगा। इस महापर्व का धार्मिक महत्व तो है ही, लेकिन इसके साथ...

Continue reading

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – राजनीति में रेवड़ी कल्चर की फैलती महामारी

-सुभाष मिश्रराजनीति में आकर अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक मुहावरे और शब्द पूरी तरह से बदल जाते हैं और दूसरा ही अर्थ देने लगते हैं। पहले भी ऐसे कईं वाक्य और शब्द थे। राजनीतिक घुसपै...

Continue reading

Editor-in-chief सुभाष मिश्र

Editor-in-chief सुभाष मिश्र की कलम से – मोहन भागवत की चेतावनी और मंदिर-मस्जिद का हल

-सुभाष मिश्रअभी कुछ दिनों पहले अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर पटना में एक महिला कलाकार द्वारा गांधीजी का प्रिय और प्रसिद्ध भजन गाया जा रहा था, जिसमें ईश्वर अल्लाह तेरे ...

Continue reading

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से विडंबनाओं और विरोधाभासों का साल

-सुभाष मिश्रबीते हुए साल अनेक विरोधाभासों और विडंबनाओं से भरे रहे । एक दूसरे की बात का विरोध और उसे काटने का उत्साह इतना उबल कर आया कि उसमें यह तक भुला दिया गया कि इनमें से कुछ...

Continue reading

नववर्ष शुभ हो- मूल्य और संक्रमण

नववर्ष शुभ हो- मूल्य और संक्रमण

-सुभाष मिश्रइक्कीसवीं सदी एक चौथाई बीतने जा रही है। पिछली सदी पर नजऱ डालने पर इक्कीसवीं सदी पूरी तरह से बदली नजऱ आने लगती है। विज्ञान, तकनीक, विश्वव्यापी बाज़ार के आक्रामक फैला...

Continue reading

विनोद कुमार शुक्ल के 89वीं जन्मदिवस, 1 जनवरी के अवसर पर

विनोद कुमार शुक्ल के 89वीं जन्मदिवस, 1 जनवरी के अवसर पर

रमेश अनुपमविनोद कुमार शुक्ल इस 1 जनवरी 2024 को अपने सुदीर्घ जीवन के 88वां वर्ष पूर्ण कर 89वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं इस अर्थ में वे हिंदी के सबसे सम्माननीय बुजुर्ग कवि-लेखक...

Continue reading