ईरान संघर्ष के बीच गैस संकट की आशंका, केंद्र सरकार ने लागू किया एस्मा

नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर एलपीजी आपूर्ति में पैदा हुए संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने घरेलू प्राकृतिक गैस की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आपातकालीन प्रावधानों के तहत एस्मा (ESMA) लागू कर दिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के बीच देश के भीतर गैस वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना है।

सरकार ने प्राकृतिक गैस आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर चार श्रेणियों में विभाजित किया है। प्राथमिकता सेक्टर-1 में घरेलू पीएनजी, परिवहन के लिए सीएनजी, एलपीजी उत्पादन और पाइपलाइन संचालन को रखा गया है। इन क्षेत्रों को उनकी पिछले छह महीने की औसत खपत का 100 प्रतिशत तक गैस कोटा उपलब्ध कराया जाएगा।

प्राथमिकता सेक्टर-2 में उर्वरक संयंत्रों को रखा गया है, जिन्हें खपत का 70 प्रतिशत गैस कोटा मिलेगा। इसी तरह प्राथमिकता सेक्टर-3 में चाय उद्योग व अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं और सेक्टर-4 में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के तहत आने वाले व्यावसायिक उपभोक्ताओं को 80 प्रतिशत तक गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लागू होने के बाद अब गैस आपूर्ति से जुड़ी सेवाओं में लगे कर्मचारी हड़ताल या काम करने से इनकार नहीं कर सकेंगे। यह कानून सुनिश्चित करता है कि संकट के समय भी आम जनता की दैनिक जरूरतों से जुड़ी सेवाएं बाधित न हों।

गैस के पुनर्वितरण के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक क्षेत्रों की मांग पूरी करने के लिए पेट्रोकेमिकल और पावर प्लांट्स जैसे कुछ क्षेत्रों की आपूर्ति में आंशिक कटौती की जा सकती है। तेल शोधन कंपनियों को उनकी औसत खपत का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराया जाएगा। बेंगलुरु जैसे शहरों में कमर्शियल गैस आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और उद्योग संगठनों के बीच समन्वय के निर्देश भी दिए गए हैं।

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