रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम के तेवर एक बार फिर बदल गए हैं। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) के प्रभाव से प्रदेश में अगले तीन दिनों तक कहीं-कहीं हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 72 घंटों के दौरान दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि रात के तापमान में अगले एक सप्ताह तक किसी विशेष बदलाव की संभावना नहीं है।
पिछले 24 घंटों का हाल: ओरछा और बचेली में सर्वाधिक वर्षा
बीते 24 घंटों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। बस्तर संभाग के ओरछा और बड़े बचेली में सबसे ज्यादा 40 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। तापमान की बात करें तो जगदलपुर 34 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म रहा, वहीं अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 11.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
क्यों बदल रहा है मौसम?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ ही हवा का चक्रवाती घेरा करीब 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक सक्रिय है। हालांकि यह सिस्टम पूर्व दिशा की ओर बढ़ते हुए कमजोर पड़ सकता है, लेकिन इसके प्रभाव से आने वाली नमी युक्त हवाएं छत्तीसगढ़ के मौसम को प्रभावित कर रही हैं।
इसके अतिरिक्त, ऊपरी वायुमंडल में एक ट्रफ लाइन (हवा की द्रोणिका) पूर्वी भारत के ऊपर सक्रिय है। गंगीय पश्चिम बंगाल और तटीय ओडिशा के पास बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण छत्तीसगढ़ में अस्थिरता और बादलों का निर्माण हो रहा है।
नमी से बढ़ रही बेचैनी
वर्तमान में एक ट्रफ लाइन तमिलनाडु और कर्नाटक होते हुए दक्षिण महाराष्ट्र तक फैली है। यह जमीनी स्तर से 1 किमी ऊपर ‘नमी की पाइपलाइन’ की तरह काम कर रही है, जो समुद्री नमी को अंदरूनी इलाकों तक पहुंचा रही है। वहीं, 5-6 किमी की ऊंचाई पर स्थित पश्चिमी विक्षोभ जैसी हलचल बादलों को फैलने में मदद कर रही है। ऊपरी स्तर की ठंडी हवा और नीचे से आने वाली नमी के मिलन से मौसम में यह अस्थिरता बनी हुई है।
किसानों की बढ़ी चिंता, बस्तर में अधिक असर की संभावना
रायपुर सहित प्रदेश के मध्य हिस्सों में शाम के वक्त धूल भरी आंधी और काली घटाएं छाने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। वाड्रफनगर जैसे क्षेत्रों में ओलावृष्टि की भी खबरें हैं, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि दक्षिण छत्तीसगढ़ (बस्तर संभाग) में बादलों का प्रभाव अधिक रहेगा।
फरवरी का महीना संक्रमण काल का होता है, जहाँ उत्तर भारत से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण अक्सर आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बनती है। विभाग ने नागरिकों को गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।