Surajpur PM Awas Yojana Scam: सूरजपुर में पीएम आवास योजना में बड़ा खेल; अधूरे मकानों को कागजों में दिखाया पूरा, लाखों का बंदरबांट

फिरोज अंसारी, सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से गरीबों के आशियाने को लेकर एक बहुत बड़ी लापरवाही और धांधली की खबर सामने आ रही है। जिले के भैयाथान ब्लॉक (Bhaiyathan Block Surajpur) की कई ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana-Gramin) के तहत बन रहे मकानों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है। यहाँ धरातल पर मकान अधूरे पड़े हैं, लेकिन कागजों और सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें पूरा (Complete) दिखाकर लाखों रुपये की राशि निकाल ली गई है। इस मामले के सामने आने के बाद से ही स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

जियो टैगिंग में हुआ बड़ा खेल, दूसरे के घरों की फोटो लगाकर निकाला पैसा

भैयाथान क्षेत्र के ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि योजना की निगरानी करने वाले ‘आवास मित्रों’ और पंचायत स्तर के जिम्मेदार कर्मचारियों ने आपस में मिलकर इस घोटाले (corruption in PM Awas) को अंजाम दिया है। नियम के मुताबिक मकान की प्रगति देखने के लिए जियो टैगिंग (Geo-tagging) की जाती है। आरोप है कि कर्मचारियों ने अधूरे पड़े मकानों, जिनमें न तो छत ढली है और न ही दरवाजे-खिड़कियां लगी हैं, उन्हें भी रिकॉर्ड में पूरा दर्शा दिया। हद तो तब हो गई जब कई मामलों में किसी दूसरे के पक्के मकान की तस्वीर खींचकर, उसे गरीब हितग्राही का घर बताकर फाइनल पेमेंट (payment release) जारी करवा लिया गया।

बिना घर पहुंचे हो गया भौतिक सत्यापन, ग्रामीणों ने खोले कई राज

स्थानीय लोगों का कहना है कि कागजी दस्तावेजों और जमीन की हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। ग्रामीणों ने पंचायत और जनपद स्तर के अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कई बड़े खुलासे किए हैं: ग्रामीणों का आरोप है कि सोशल ऑडिट और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करने वाली टीमें कभी गांवों में हितग्राहियों के घर पहुंची ही नहीं। दफ्तर में बैठकर ही कागजों पर गरीबों के फर्जी दस्तखत करा लिए गए। आरोप यह भी है कि आवास पूरा होने पर मिलने वाली 90 दिनों की मनरेगा मजदूरी की राशि को हड़पने के चक्कर में अधूरे मकानों को जल्दबाजी में ‘पूर्ण’ दिखाया जा रहा है। कई ग्राम पंचायतों में एक ही सचिव को तीन से चार गांवों का प्रभार (additional charge) दिया गया है, जिससे जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग पूरी तरह ठप हो गई है।

इस पूरे मामले पर ग्रामीणों ने जनपद पंचायत भैयाथान से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगाई है कि पूरे ब्लॉक के आवासों की निष्पक्ष जांच (impartial probe) हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। दूसरी तरफ, इस बड़े घपले पर स्थानीय जन प्रतिनिधियों की चुप्पी ने आग में घी डालने का काम किया है।

एक तरफ भ्रष्टाचार, दूसरी तरफ सीएम साय ने जारी किए ₹2,677 करोड़

सूरजपुर जिले में जहां निचले स्तर के अधिकारी-कर्मचारी केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना (housing scheme) को पलीता लगाने में तुले हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार गरीबों को घर देने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (CM Vishnu Deo Sai) के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 2677.15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की है।

‘स्पर्श मॉड्यूल’ से हुआ आवंटन, मुख्यमंत्री ने दिए कड़े निर्देश

यह पूरी राशि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एसएनए स्पर्श मॉड्यूल (SNA Sparsh Module) के माध्यम से सीधे जिलों को आवंटित की गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साफ कहा है कि हमारी सरकार सुशासन और पारदर्शिता (transparency in governance) के साथ अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। दावों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में इस समय हर दिन 1,600 से अधिक पक्के मकान बनाए जा रहे हैं और पिछले ढाई साल में 10.60 लाख से ज्यादा घर पूरे किए जा चुके हैं।

सीएम साय ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि पैसों का सही इस्तेमाल हो और गरीबों के मकान समय पर पूरे किए जाएं। सरकार ने पानी बचाने के लिए 1.5 लाख से अधिक आवासों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (Rain Water Harvesting) सिस्टम भी जोड़ा है। साथ ही, किसी भी तरह की शिकायत के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-233-1290 और पंचायतों में क्यूआर कोड (QR Code) की व्यवस्था की गई है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री की इस सख्ती के बाद सूरजपुर प्रशासन भैयाथान ब्लॉक के दोषियों पर क्या एक्शन लेता है।

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