Saraipali News : दिलीप गुप्ता सरायपाली: लगभग 40 करोड़ रुपए का गौरवपथ अपने निर्माण की शुरुआत से ही विवादों के घेरे में रहा है। भ्रष्टाचार, अनियमितताओं, दो अधिकारियों का निलंबन और भारी कमीशन की चाहत में अविश्वास प्रस्ताव लाने जैसे घटनाक्रमों ने इसकी साख पर सवाल खड़े किए हैं। गौरवपथ के स्वरूप में परिवर्तन कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना, अनगिनत क्रासिंग छोड़ना (जिन्हें वोट लेने के बाद बंद कर दिया गया), और अपने चहेतों को उपकृत करना यहाँ आम बात हो गई है।
जयस्तंभ चौक के दोनों तरफ खतरनाक ढंग से क्रासिंग छोड़ी गई है। जब सर्विस रोड बनाया जाना था, तब उसके स्थान पर बिजली खंभों व ट्रांसफार्मर को स्थापित करना समझ से परे है। सर्विस रोड व सहायक नाली निर्माण को क्यों रोका गया और कार्य शेष होने के बावजूद ठेकेदार को 99 प्रतिशत भुगतान क्यों कर दिया गया? बैतारी स्थित ऑयल मिल के सामने भारी चौड़ी क्रासिंग छोड़ना, निर्माण स्थलों पर सूचना बोर्ड न लगाना और सूचना के अधिकार के तहत जानकारी न देना ऐसे अनेक प्रश्न हैं, जिनका जवाब नगरपालिका प्रशासन और नपाध्यक्ष को देना चाहिए, पर इसकी उम्मीद कम ही है।
अजीब तकनीक: कहीं सड़क से ऊपर तो कहीं नीचे बनी नाली गौरवपथ के दोनों तरफ नाली निर्माण का उद्देश्य सड़क के पानी की निकासी बताया गया था। किंतु तकनीकी खामियां ऐसी हैं कि कई स्थानों पर नाली सड़क से एक फीट नीचे है, तो कहीं डेढ़ फीट ऊँची। जानकारों का कहना है कि नाली में पानी निकासी के लिए सही ढाल (Slope) ही नहीं दिया गया है, जिससे पानी की निकासी संभव नहीं है। वर्तमान में नाली के अंदर मिट्टी, कचरा और बदबूदार पानी जाम है। जब नगरपालिका पुरानी नालियों की सफाई नहीं कर पा रही, तो इतनी बड़ी नाली की सफाई कैसे होगी?
घटिया सामग्री और निगरानी का अभाव ठेकेदार को अभी नगरपालिका से NOC नहीं मिली है, फिर भी नाली निर्माण में प्रयुक्त घटिया सामग्री और उप-अभियंता की लापरवाही उजागर हो रही है। चर्चा है कि करोड़ों की इस योजना के निरीक्षण के लिए कभी कोई जिम्मेदार अधिकारी या नपाध्यक्ष स्थल पर नहीं पहुंचे। इसी लापरवाही के कारण नाली के ऊपर बने स्लैब अपने आप टूट रहे हैं। हल्की वजन वाली ट्रकों का लोड भी यह नाली नहीं सह पा रही है।
संवाददाता के घर के सामने, भारत पेट्रोलियम, और डी-मार्ट के सामने ऐसी ही शिकायतें मिली हैं। नाली टूटने के 3 महीने बाद भी जब मरम्मत नहीं हुई, तो संवाददाता ने स्वयं के खर्च पर मरम्मत कराई। आज भी ईवाश वुडलैंड स्कूल, विश्राम गृह, जगन्नाथ पेट्रोल पंप और वन जांच चौकी के पास स्लैब टूटे हुए हैं। वहीं, राजेश अग्रवाल से जयस्तंभ चौक तक नाली बनी ही नहीं है और दुर्गा प्रेम के सामने पीपल वृक्ष के नाम पर निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है।
सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ा भ्रष्टाचार नगरपालिका की अनदेखी के कारण सत्ता परिवर्तन के बाद से प्रत्येक निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है। इसी के विरोध में कांग्रेस समर्थित विधायक चातुरी नंद द्वारा धरना-प्रदर्शन और शिकायतें की गईं। जब कार्यवाही संतोषजनक नहीं हुई, तो मामला विधानसभा पटल पर भी उठाया गया। नगरपालिका में अपनों को उपकृत करने की नीति के कारण ही अनियमितताएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।