अमेरिका के नए चक्रव्यूह में फंसा भारत का व्यापार? वाशिंगटन में भारतीय अफसर ने दिया मुंहतोड़ जवाब

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर एक बार फिर आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। एक तरफ जहां खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है, वहीं दूसरी तरफ भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मोर्चे पर भी खींचतान तेज हो गई है। अमेरिका ने भारत समेत कई देशों से आने वाले सामानों पर भारी टैक्स यानी अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी की है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि यानी यूएसटीआर के इस एकतरफा प्रस्ताव पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है। वाशिंगटन में हुई एक सार्वजनिक सुनवाई के दौरान भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के बड़े अधिकारियों ने अमेरिकी नियमों में मौजूद बड़ी खामियों और दोहरे मापदंडों को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है। इस टकराव का असर आने वाले दिनों में वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ना तय माना जा रहा है।

खाड़ी में युद्ध के बीच कतर की ओर बढ़ा भारतीय जहाज

रणनीतिक मोर्चे पर बात करें तो ईरान और अमेरिका के बीच नए सिरे से जंग छिड़ने के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ यानी होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा बेहद सख्त कर दी गई है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाता है। युद्ध के कारण इस खतरनाक रास्ते से वाणिज्यिक जहाजों का गुजरना लगभग नामुमकिन हो चुका है। इस बेहद तनावपूर्ण माहौल के बीच भारतीय ध्वज वाला जहाज ‘नंदा देवी’ तेजी से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में कामयाब रहा है। इस समय होर्मुज क्षेत्र में प्रवेश करने वाला यह एकमात्र एलपीजी वाहक यानी गैस ले जाने वाला जहाज है, जो तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की लोडिंग के लिए कतर के रास लाफान बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। भारत की यह बहादुरी खाड़ी क्षेत्र में उसकी मजबूत रणनीतिक पकड़ को दर्शाती है।

अमेरिका की दोहरी नीति पर भारत का तीखा प्रहार

एक तरफ जहां समंदर में भारतीय जहाज अपनी राह बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी व्यापारिक नीतियों के खिलाफ भारत ने सख्त रुख अपना लिया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने बंधुआ मजदूरी से जुड़े सामानों का हवाला देकर भारत के निर्यात पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस पर आयोजित सार्वजनिक सुनवाई में वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा ने अमेरिकी रुख की बड़ी असंगतियों की ओर ध्यान दिलाया।

भारतीय संयुक्त सचिव ने अमेरिकी समिति के सामने साफ कहा कि अमेरिका एक तरफ तो बंधुआ मजदूरी की बात करता है, लेकिन दूसरी तरफ अपने देश की जरूरतों के हिसाब से 1600 ऐसे सामानों को जांच से पूरी तरह छूट दे देता है जिनका उत्पादन या खेती खुद अमेरिका की धरती पर नहीं हो सकती। भारत का कहना है कि अमेरिका की यह रियायत दुनिया भर की सप्लाई चेन में बंधुआ मजदूरी से निपटने के मुख्य उद्देश्य को ही कमजोर करती है और नियमों से बचने का रास्ता खोलती है।

मनमानी शर्तों और टैक्स स्लैब का पूरा गणित

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 11 और 12 मार्च 2026 को बंधुआ मजदूरी और जरूरत से ज्यादा औद्योगिक क्षमता का आरोप लगाकर दुनिया के 60 देशों के खिलाफ अपनी ‘धारा 301’ के तहत जांच शुरू की थी। इसके बाद 3 जून को जारी रिपोर्ट में अमेरिका ने 54 देशों से आने वाले सामानों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की सिफारिश की है। इस भेदभावपूर्ण नीति का पूरा विवरण इस प्रकार है:

  • 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क: कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मेक्सिको और पाकिस्तान से होने वाले आयात पर।
  • 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क: भारत और चीन समेत 48 अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से होने वाले आयात पर।

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका अपने देश के कपास का इस्तेमाल करने वाले कपड़ा उत्पादों के निर्यात पर तो कम टैरिफ यानी कम शुल्क लगाता है, लेकिन विदेशी गारमेंट निर्माताओं पर मनमानी शर्तें थोपता है। यह विदेशी कंपनियों के फैसले लेने की आजादी को सीमित करता है और इससे मूल समस्या का समाधान भी नहीं होता।

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