नई दिल्ली। एक तरफ जहाँ मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से जंग शुरू हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ समंदर के सबसे संवेदनशील रास्ते पर तनाव चरम पर पहुँच गया है. इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य पर सुरक्षा पाबंदियां और सख्ती बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है. इस खतरनाक रास्ते से दुनिया भर के वाणिज्यिक जहाजों का निकलना बेहद मुश्किल हो गया है. लेकिन इस भीषण तनाव के बीच भारतीय ध्वज वाले एक बड़े जहाज ने बेहद तेजी से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करके सबको चौंका दिया है. भारतीय नियंत्रण वाला यह जहाज ‘नंदा देवी’ इस समय होर्मुज क्षेत्र में प्रवेश करने वाला एकमात्र एलपीजी वाहक जहाज है. यह जहाज सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ते हुए लोडिंग के लिए कतर के रास लाफान बंदरगाह की ओर जा रहा है.
रात के अंधेरे में सफर करने को मजबूर हुए दुनिया के जहाज
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली संस्था एसएंडपी ग्लोबल मिंट और एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटीज एट सी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 7 जुलाई को होर्मुज जलडमरूमध्य से कुल पारगमन की संख्या 47 पर स्थिर रही. हालांकि, इस रास्ते को पार न करने वाले यानी डरकर रुक जाने वाले जहाजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है.
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 7 जुलाई को रात के समय यात्रा करने वाले जहाजों की संख्या अचानक बढ़ गई. ओमान तट के किनारे वाले सुरक्षित मार्ग से केवल एक ही पोत स्पष्ट रूप से गुजरता हुआ दिखाई दिया. कुल मिलाकर दिन के दौरान होने वाली समुद्री यात्राओं में से 36 फीसदी यात्राएं सिर्फ रात के अंधेरे में की गईं ताकि हमलों से बचा जा सके.
जानिए होर्मुज से इस समय कौन-कौन सी चीजें लेकर गुजर रहे हैं जहाज
7 जुलाई को इस खतरनाक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कुल यातायात में 10 बल्क कैरियर, 7 वीएलसीसी (बेहद बड़े कच्चे तेल के टैंकर), 6 उत्पाद टैंकर, 5 एलपीजी टैंकर, 5 कंटेनर जहाज और 5 मालवाहक जहाज शामिल थे. बाकी बचे जहाजों में अलग-अलग तरह के छोटे पोत थे.
इस पूरे आवागमन में से केवल एक चौथाई हिस्सा ही आने वाले यानी खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों का था. यह 12 जून के बाद से सबसे कम दैनिक अनुपात दर्ज किया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा जंग शुरू होने से दुनिया के ज्यादातर जहाज इस क्षेत्र में आने से कतरा रहे हैं. हालांकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कई जहाजों ने पकड़े जाने के डर से घने अंधेरे में जलडमरूमध्य को पार किया होगा, जिसकी सटीक निगरानी समय अंतराल के कारण बाद में ही हो पाएगी. इस समय ऊर्जा और ईंधन से संबंधित जहाजों का कुल आवागमन में मात्र 38% हिस्सा बचा है, जो 28 जून के बाद से सबसे निचला स्तर है.
आखिर क्यों अचानक भड़की अमेरिका और ईरान में जंग?
इस पूरे विवाद की शुरुआत वाणिज्यिक जहाजों पर हुए अतिरिक्त हमलों के बाद हुई है. अमेरिकी केंद्रीय कमान (यूएस सेंट्रलम कमान) ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि 7 जुलाई को दो बड़े जहाजों को निशाना बनाया गया था. इन हमलों के जवाब में अमेरिका ने ईरान की संपत्तियों पर, मुख्य रूप से उसके होर्मोज़गान प्रांत में, ताबड़तोड़ हवाई हमले किए.
इस अमेरिकी कार्रवाई से भड़के ईरान ने अगले ही दिन यानी 8 जुलाई को बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण जवाबी मिसाइल हमले कर दिए. इस तनाव का असर व्यापार पर भी पड़ा है. अमेरिकी वित्त विभाग ने जून में ईरान को जारी किया गया वह विशेष लाइसेंस भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है, जिसके तहत ईरान को वैश्विक बाजार में अपना तेल बेचने की अनुमति मिली थी.