अधूरा काम छोड़कर भागा ठेकेदार,, धंसी कंक्रीट संरचना, सैकड़ों किसानों की फसलों पर मंडराया बर्बादी का संकट
सूरजपुर / लांजित
जल संसाधन विभाग के दावों और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पोल मानसून की पहली ही बौछार ने खोलकर रख दी है।
ग्राम पंचायत लांजित में करोड़ों की लागत से कराए जा रहे नहर लाइनिंग का निर्माणाधीन ढांचा पहली ही तेज बारिश को झेल नहीं पाया। नहर के कई हिस्से ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं, कंक्रीट की संरचना धंस चुकी है और बड़े पैमाने पर कटाव शुरू हो गया है। ठेकेदार की इस लापरवाही ने अब पूरे गांव को संकट में डाल दिया है, जिससे ग्रामीणों और किसानों में भारी आक्रोश है।

सरपंच ने खोला मोर्चा, कार्यपालन अभियंता को सौंपा ज्ञापन
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत लांजित के सरपंच धरम सिंह आयम ने बीते 2 जुलाई को कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग सूरजपुर को एक तीखा ज्ञापन सौंपा है।
सरपंच ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि संबंधित ठेकेदार काम को अधूरा और लावारिस छोड़कर भाग खड़ा हुआ है। नहर की सफाई, वर्षा जल निकासी ड्रैनेज और सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं किए गए जिसका नतीजा आज सबके सामने है।
पहाड़ी का पानी मचाएगा तबाही जिम्मेदार कौन
लांजित भौगोलिक रूप से पहाड़ी के ठीक नीचे बसा गांव है। तेज बारिश होने पर पहाड़ से आने वाला पानी इसी नहर के रास्ते मैनेज होना था। लेकिन जल निकासी की व्यवस्था न होने से अब यह पानी खेतों और सड़कों की तरफ रुख कर रहा है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो गांव की मुख्य सड़कें बह जाएंगी और सैकड़ों एकड़ में लगी फसलें जलमग्न होकर बर्बाद हो जाएंगी।

जनधारा की विशेष पड़ताल,, इन 3 मोर्चों पर ग्रामीणों को भारी नुकसान की आशंका
कृषि व फसलें,, लाखों रुपये की आर्थिक क्षति खेतों में जलभराव और उपजाऊ मिट्टी का कटाव
गांव का इंफ्रास्ट्रक्चर,, सड़कें और संपर्क मार्ग पानी के तेज बहाव से सड़कों का पूरी तरह टूटना
सरकारी खजाना,, जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी पहली ही बारिश में कंक्रीट संरचना का धंसना भ्रष्टाचार की ओर इशारा
ग्रामीणों की दो टूक
नुकसान हुआ तो भुगतेगा विभाग और ठेकेदार
ग्रामीणों का साफ कहना है कि पहली ही बारिश में नहर का इस तरह क्षतिग्रस्त होना घटिया निर्माण सामग्री और लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। सरपंच और ग्रामीणों ने विभाग को चेतावनी देते हुए कहा है कि बारिश के मौसम को देखते हुए नहर लाइनिंग का अधूरा कार्य और जल निकासी की व्यवस्था तत्काल युद्ध स्तर पर पूरी की जाए।
यदि इस अधूरी संरचना के कारण किसी भी किसान की फसल या ग्रामीण की संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार और जल संसाधन विभाग की होगी और ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
