मस्कट।
ओमान तट के पास समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बेहद गंभीर हो गई हैं। बुधवार को हुए हमले के अभी 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि गुरुवार को एक और जहाज पर हमले की खबर सामने आई है। यह ताजा हमला ओमान के शिनास बंदरगाह के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हुआ है, जिसकी पहचान ‘एमटी जलवीर’ (MT Jalveer) के रूप में की गई है। सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में सामने आई तस्वीरों में इस जहाज को समुद्र के बीच धू-धू कर जलते हुए देखा जा सकता है। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने इस हमले की पुष्टि की है और मामले से जुड़ी अन्य जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
प्रशासनिक एजेंसियां स्थिति पर रख रही हैं नजर
घटना के तुरंत बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से जारी बयान में कहा गया कि गुरुवार को शिनास बंदरगाह के पास एक पोत (वेसल) से संबंधित गंभीर घटना की सूचना मिली है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर घटना के विस्तृत कारणों और इसके संभावित प्रभावों का पता लगाया जा रहा है। हालांकि, अभी तक हमले के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
बुधवार को हुए हमले में दो भारतीयों के शव बरामद, एक अब भी लापता
इससे पहले बीते बुधवार (10 जून) को भी ओमान तट के पास ‘सेटेबेलो’ नामक एक कमर्शियल जहाज को निशाना बनाया गया था। इस जहाज पर कुल 28 चालक दल (क्रू) के सदस्य सवार थे, जिनमें से 24 नागरिक भारतीय थे। इस हमले के बाद शुरू किए गए बचाव अभियान में 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया था, जबकि 3 भारतीय लापता हो गए थे। ताजा जानकारी के अनुसार, लापता तीन भारतीयों में से दो के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि एक की तलाश अब भी जारी है। भारत सरकार ने इस कायरतापूर्ण हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है।
भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय सक्रिय
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि ओमान में भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। दूतावास के अधिकारी लापता नागरिक की तलाश के लिए चलाए जा रहे खोज और बचाव अभियान में ओमान के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहे हैं। इसके साथ ही प्रभावित क्रू सदस्यों को हरसंभव सहायता पहुंचाई जा रही है।
ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी का नतीजा हो सकता है हमला
वैश्विक समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ब्रिटिश मैरीटाइम सिक्योरिटी ग्रुप ‘एम्ब्रे’ के हवाले से इस पूरे घटनाक्रम पर एक महत्वपूर्ण दावा किया है। सुरक्षा समूह के अनुसार, यह संभवतः ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी करने के लिए चलाए जा रहे अमेरिकी ऑपरेशन का नतीजा हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही क्रू सदस्यों को आगाह किया था कि किसी भी संभावित हमले की स्थिति में वे जहाज के पिछले हिस्से के बजाय अगले हिस्से (बो) पर इकट्ठा हों, ताकि नुकसान को कम किया जा सके। मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जांच तेज कर दी गई है।