बीएसयूपी कॉलोनी में तुलसी पूजन से शुरू हुआ विवाद, कॉलोनी में धार्मिक तनाव की चर्चा, दोनों समुदायों के बीच बढ़ी तल्खी

रायपुर। रायपुर के गोकुल नगर स्थित बीएसयूपी कॉलोनी में दो परिवारों के बीच शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द से जुड़े मुद्दों तक पहुंच गया है। हिंदू और ईसाई समुदाय से जुड़े कुछ परिवारों ने कॉलोनी में रहने वाले एक मुस्लिम परिवार पर धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप, धार्मिक प्रतीकों के अपमान और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं। वहीं आरोपों के घेरे में आए परिवार ने मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखने से इनकार कर दिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार विवाद की शुरुआत एक छोटी-सी घटना से हुई। एक हिंदू महिला ने तुलसी के पौधे के पास मोबाइल रखकर रील बनाई थी। इसी दौरान रविवार के दिन तुलसी के पौधे को छूने को लेकर आपत्ति जताई गई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

हिंदू परिवारों का आरोप है कि विवाद के दौरान महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और मारपीट की गई। कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनके साथ धक्का-मुक्की की गई तथा एक महिला के कपड़े फट जाने से उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित होना पड़ा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। विवाद केवल एक दिन की घटना तक सीमित नहीं है। कॉलोनी के कुछ निवासियों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक गतिविधियों को लेकर आपत्तियों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि घर की चौखट पर गोबर से लिपाई करने, तुलसी पूजन करने और धार्मिक प्रतीकों को स्थापित करने पर भी विरोध जताया गया। कुछ लोगों ने तुलसी के पौधे और भगवान हनुमान की प्रतिमा के प्रति असम्मानजनक व्यवहार किए जाने के आरोप भी लगाए हैं।

मामले में ईसाई समुदाय से जुड़ी कॉलोनी निवासी पिंकी जॉर्ज ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका आरोप है कि धार्मिक आयोजनों को लेकर उन्हें भी आपत्तिजनक टिप्पणियों और असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि उनके धार्मिक प्रतीकों और आस्था के प्रति भी सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया। बताया जाता है कि आरोपों के घेरे में आए परिवार ने पहले मीडिया कवरेज पर आपत्ति जताई और बाद में अपना पक्ष रखने की बात कही। हालांकि बाद में परिवार की ओर से किसी वयस्क सदस्य ने कैमरे के सामने आने से इनकार कर दिया। मीडिया कर्मियों के अनुसार बातचीत के लिए नाबालिग को आगे किया गया, लेकिन पत्रकारिता की नैतिक मर्यादाओं के तहत नाबालिग का बयान रिकॉर्ड नहीं किया गया।

कॉलोनी के कई निवासियों का कहना है कि यहां वर्षों से विभिन्न धर्मों के लोग आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ रहते आए हैं। उनका मानना है कि किसी एक विवाद या परिवार के व्यवहार के आधार पर पूरे समुदाय को नहीं देखा जाना चाहिए। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर तथ्य सामने लाने और सभी पक्षों को न्याय दिलाने की मांग की है।

घटना के बाद धार्मिक स्वतंत्रता और आपसी सम्मान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था और परंपराओं के अनुसार धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है। ऐसे में किसी भी प्रकार के विवाद का समाधान कानून और संवाद के माध्यम से होना चाहिए, ताकि सामाजिक सौहार्द और सामुदायिक विश्वास बना रहे।

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