समाजसेवी रूबी सिंह ठाकुर ने ममता और मानवता की पेश की मिसाल, मां की मौत के बाद दुधमुंहे बच्चों और परिवार को दिया सहारा

दिलीप गुप्ता | सरायपाली

अंतरजातीय विवाह को लेकर आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक भेदभाव और बहिष्कार की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसी ही एक संवेदनशील घटना महासमुंद जिले के ग्राम बानीपाली बरबसपुर से सामने आई, जहां एक महिला की मौत के बाद उसके परिवार को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा। इस कठिन समय में समाजसेवी रूबी सिंह ठाकुर ने आगे बढ़कर न सिर्फ अंतिम संस्कार कराया बल्कि दुधमुंहे बच्चों और परिवार को भी सहारा दिया।

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम बानीपाली बरबसपुर निवासी मिनिकेतन बारीक ने अंतरजातीय विवाह किया था। इसी कारण परिवार सामाजिक रूप से बहिष्कृत जीवन जी रहा था। मिनिकेतन की पत्नी जनता बारीक लंबे समय से रक्त संबंधी बीमारी से पीड़ित थीं। इलाज के दौरान उन्हें 100 बिस्तर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई।

बताया गया कि अंतरजातीय विवाह के कारण गांव और समाज के लोगों ने मृतिका के अंतिम संस्कार में सहयोग करने से इनकार कर दिया। मामले की जानकारी मिलने पर समाजसेवी रूबी सिंह ठाकुर अपने सहयोगियों विकास महापात्र, गुड्डू जायसवाल, नरेंद्र माझी, नसीम खान और हिमांशु बरामते के साथ आगे आईं।

सभी ने मिलकर सरायपाली में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई और हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराया। मृतिका के 6 वर्षीय बेटे त्रिविक्रम बारीक के हाथों मुखाग्नि दिलाई गई।

इस दौरान परिवार के छोटे बच्चों की जिम्मेदारी भी समाजसेवी टीम ने संभाली। भीषण गर्मी के बीच 6 माह के दुधमुंहे बच्चे गोकुल बारीक और 4 वर्षीय त्रिविक्रम बारीक की देखभाल, भोजन और जरूरी व्यवस्थाएं कर उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाया गया।

रूबी सिंह ठाकुर ने बताया कि ऐसे समय में मानवता सबसे बड़ा धर्म होता है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार को सामाजिक बहिष्कार के कारण अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

गौरतलब है कि रूबी सिंह ठाकुर लंबे समय से सामाजिक सेवा के कार्यों से जुड़ी हुई हैं। कोरोना काल में उन्होंने कई कोविड पीड़ितों के अंतिम संस्कार कराए थे। इसके अलावा रक्तदान, बुजुर्गों की सेवा, गौ सेवा और जरूरतमंदों की मदद जैसे कार्यों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।

इस घटना के बाद क्षेत्र में रूबी सिंह ठाकुर के प्रयासों की काफी सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि उन्होंने मानवता, संवेदनशीलता और ममता की एक नई मिसाल पेश की है।

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