छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत संचालित राशन दुकानों में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है जहां गरीबों के हक के चावल पर सरेआम डाका डाला जा रहा है। शासन की महत्वपूर्ण योजना को ठेंगा दिखाते हुए कुछ राशन दुकानदार कार्डधारकों को अनाज देने के बजाय जबरन नकद राशि लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं जो सीधे तौर पर गरीबों के अधिकारों का हनन और नियमों का उल्लंघन है। रायपुर के कामरेड सुधीर मुखर्जी वार्ड और लालपुर स्थित एमएमआई अस्पताल के पास वाली दुकानों में यह गंभीर अनियमितता पाई गई है जिनका संचालन एक ही संचालक के नाम पर होने की जानकारी सामने आई है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि संचालक खुलेआम चुनौती देते हुए कह रहा है कि जिसे पैसा लेना हो वही आए वरना अनाज कहीं और से ले लें जिससे यह साफ है कि राशन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और उन्हें प्रशासन का कोई डर नहीं है।
चावल के बदले कौड़ियों के दाम का खेल और तीन माह के राशन में हेराफेरी
स्थानीय निवासियों ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि राशन दुकान संचालकों ने आपस में साठगांठ कर चावल का एक अवैध रेट तय कर लिया है जिसके तहत बाजार में ऊंचे दामों पर बिकने वाले चावल को गरीबों से मात्र 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से वापस खरीदा जा रहा है। कई कार्डधारकों ने यह भी शिकायत की है कि उन्हें तीन महीने के कोटे में से केवल दो महीने का राशन दिया जा रहा है और तीसरे महीने के अनाज के बदले चंद रुपये थमाकर चुप करा दिया जाता है। इस संगठित भ्रष्टाचार के कारण जरूरतमंद परिवारों के पास अपनी आजीविका चलाने के लिए पर्याप्त अनाज नहीं पहुंच पा रहा है और वे बाजार से महंगे दामों पर राशन खरीदने को मजबूर हैं जिससे पूरी वितरण प्रणाली के उद्देश्यों पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
धमतरी में भी हाहाकार और मजदूरों के सामने भुखमरी का संकट
राशन घोटाले की यह आंच रायपुर तक ही सीमित नहीं है बल्कि धमतरी जिले के कुरुद ब्लॉक में भी चावल की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने की जानकारी मिली है जिससे रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों के चूल्हे बुझने की नौबत आ गई है। कुरुद क्षेत्र के सेल्समैन चावल उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर लगातार तारीख पर तारीख दे रहे हैं जिससे ग्रामीण जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। यदि खाद्य विभाग और प्रशासन ने चावल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कड़े कदम नहीं उठाए तो स्थिति और भयावह हो सकती है क्योंकि राशन पर निर्भर मजदूर वर्ग अब भुखमरी की कगार पर पहुंच चुका है। शासन को इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कर दोषी संचालकों के लाइसेंस रद्द करने और उन्हें जेल भेजने की कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि सरकारी योजनाओं में सेंधमारी करने वालों को सबक मिल सके।