नई दिल्ली: इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने अपनी मासिक रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एजेंसी के अनुसार, इस साल की दूसरी तिमाही में कच्चे तेल की मांग में वर्ष 2020 की महामारी के बाद सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण तेल की बढ़ती कीमतों ने कई देशों और उद्योगों को इसकी खपत कम करने पर मजबूर कर दिया है।
मांग में कमी का अनुमान
आईईए की रिपोर्ट के अनुसार, तेल की मांग में प्रतिदिन 1.5 मिलियन बैरल की गिरावट आ सकती है। अनुमानों के मुताबिक, मार्च में मांग में 8 लाख बैरल प्रतिदिन और अप्रैल में 2.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी आने की संभावना है। यह अनुमान इस आधार पर लगाया गया है कि मई तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते तेल की शिपमेंट दोबारा शुरू हो जाएगी, जिसे ईरान ने फरवरी के अंत में हवाई हमलों के बाद बंद कर दिया था।
ऊर्जा संकट की चेतावनी
एजेंसी ने चेतावनी दी है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो तेल की मांग में और भी भयानक गिरावट आ सकती है। ऐसी स्थिति में दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बड़े व्यवधानों का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कीमतों में इस उछाल और आपूर्ति में कमी का व्यापक असर उद्योगों पर पड़ रहा है, जिसे ‘डिमांड डिस्ट्रक्शन’ कहा जा रहा है।
रूस के तेल निर्यात में भारी उछाल
मध्य-पूर्व में उपजे इस संकट के बीच रूस की तेल से होने वाली कमाई में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च महीने में रूस ने तेल निर्यात से लगभग 19 अरब डॉलर की कमाई की, जो पिछले महीनों की तुलना में लगभग दोगुनी है। अमेरिका द्वारा तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से रूसी तेल पर प्रतिबंधों में ढील देने के कारण रूस का निर्यात बढ़कर 7.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच गया है।
