तेहरान। मिडल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रति अपना रुख कड़ा करते हुए उसे सीधे तौर पर चेतावनी दी है। ईरान का आरोप है कि यूएई इस युद्ध में केवल मूक दर्शक नहीं है, बल्कि अमेरिका और इजरायल को अपने सैन्य ठिकाने और हवाई सुविधाएं उपलब्ध कराकर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यदि ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार का जमीनी हमला या उसके द्वीपों पर कब्जे की कोशिश होती है, तो वह उस देश को सीधा दुश्मन मानेगा जहां से हमला शुरू किया गया है। मिडल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने संकेत दिया है कि ऐसी स्थिति में उसका जवाब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह संबंधित देश के सरकारी संस्थानों, आर्थिक ढांचे और व्यावसायिक हितों को भी निशाना बना सकता है।
यह तनाव विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित ईरानी द्वीपों, खार्ग और केशम को लेकर बढ़ रहा है। चर्चा है कि अमेरिका इन द्वीपों पर नियंत्रण की संभावनाओं पर विचार कर रहा है, जिसके लिए खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी बेस का उपयोग किया जा सकता है। ईरान का मानना है कि हालिया ऑपरेशंस में यूएई के बुनियादी ढांचे और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल उसे निशाना बनाने के लिए किया गया है। दूसरी ओर, अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की तैयारी कर रहा है, जिससे आने वाले समय में टकराव और बढ़ने की आशंका है।