बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक युवक से लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। विशाखापत्तनम की रहने वाली मां-बेटी ने मंत्री कोटा से नियुक्ति दिलाने का भरोसा देकर एक पीड़ित परिवार से करीब 15 लाख रुपये वसूल लिए। तोरवा पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, साई भूमि क्षेत्र के निवासी एन. वेंकट सूर्यप्रताप ने इस ठगी की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक, अगस्त 2020 में उनकी पुरानी परिचित टी. इंद्राणी ने फोन कर उनके बेरोजगार बेटे एन. विजय किशन को रेलवे में नौकरी लगवाने का प्रलोभन दिया था। आरोपी महिला ने दावा किया था कि वह मंत्री कोटा के माध्यम से सीधे नियुक्ति करा सकती है। पुरानी पहचान होने के कारण पीड़ित परिवार उनके झांसे में आ गया।
ठगी को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया। रेल मंत्रालय के नाम से फर्जी ईमेल आईडी बनाई गई और समय-समय पर पीड़ित को गुमराह करने के लिए मेल भेजे गए। हद तो तब हो गई जब 23 मई 2024 को आरोपियों ने एक फर्जी नियुक्ति पत्र भी भेज दिया, जो देखने में बिल्कुल असली लग रहा था। इन दस्तावेजों के आधार पर पीड़ित को विश्वास दिलाया गया कि भर्ती की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
आरोपी महिला इंद्राणी ने ठगी की रकम अपनी बेटी वलिवेटी वेंकट नागा कीर्ति के बैंक खाते में किस्तों में जमा कराई। पीड़ित ने अलग-अलग 18 बार में कुल 14 लाख 98 हजार रुपये ट्रांसफर किए। शुरुआत में चार लाख रुपये लेने के बाद आरोपी कभी कोरोना काल तो कभी चुनाव आचार संहिता का बहाना बनाकर समय टालते रहे। जब लंबे समय बाद भी ज्वाइनिंग नहीं हुई और आरोपियों ने और पैसों की मांग शुरू की, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ।
तोरवा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और ईमेल आईडी की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। दोनों महिला आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही टीम भेजकर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर रेलवे भर्ती के नाम पर सक्रिय ठग गिरोहों की कार्यप्रणाली को उजागर किया है।