दुर्ग। जिले के निजी अस्पतालों में नर्सिंग होम अधिनियम के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच दलों की रिपोर्ट के आधार पर जिले के पांच निजी अस्पतालों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। वहीं, अन्य 48 अस्पतालों में खामियां मिलने पर उनसे 30 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज दानी ने बताया कि जिले में संचालित 124 निजी अस्पतालों और आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत नर्सिंग होम का एक माह के भीतर भौतिक निरीक्षण करने के लिए चार विशेष टीमों का गठन किया गया था। जांच के दौरान निर्धारित मानकों और चेक लिस्ट के अनुसार अस्पतालों की व्यवस्थाओं का आकलन किया गया। प्रथम चरण की रिपोर्ट में 48 अस्पतालों में कमियां पाई गई थीं, जिन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।
विभाग द्वारा प्राप्त जवाबों की समीक्षा के बाद इन 48 अस्पतालों का पुनः निरीक्षण किया गया। दोबारा जांच के दौरान पांच अस्पतालों में मानकों का स्पष्ट उल्लंघन पाया गया और पूर्व में बताई गई कमियों को दूर नहीं किया गया था। इसे छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी अनुज्ञापन अधिनियम 2010 एवं नियम 2013 के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है।
नर्सिंग होम एक्ट के तहत जिन अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उनमें जामगांव आर पाटन का दाऊजी मेमोरियल हॉस्पिटल, पुलगांव का प्राची हॉस्पिटल, जामुल भिलाई का जीवन ज्योति हॉस्पिटल, न्यू खुर्सीपार का आईएमआई हॉस्पिटल और जीई रोड भिलाई स्थित आशीर्वाद नर्सिंग होम शामिल हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले के स्वास्थ्य क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। सीएमएचओ ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी।