रायपुर, मार्च 2026: छोटे किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि खेती से होने वाली आमदनी अक्सर मौसम और फसल पर निर्भर रहती है। ऐसे में, साल भर स्थिर कमाई का कोई दूसरा जरिया नहीं मिल पाता। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए, वेदांता एल्युमीनियम ने किसानों को मधुमक्खी-पालन से जोड़ने की पहल शुरू की है।
कंपनी ने अपनी सीएसआर पहल के तहत ‘वेदमृत जिबिका किसान उत्पादक कंपनी’ की शुरुआत की है और ‘वेदमृत- 100% शुद्ध शहद’ ब्रांड लॉन्च किया है। इसके साथ ही पूर्वी भारत का एक बड़ा शहद उत्पादक किसान संगठन भी बनाया गया है। पहले चरण में 500 से ज्यादा किसानों को प्रशिक्षण देने के बाद मधुमक्खी के बॉक्स दिए गए हैं, ताकि वे शहद उत्पादन शुरू कर सकें।
अनुमान है कि एक मधुमक्खी बॉक्स से किसानों को साल में करीब 16,000 रुपए तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है। यह संगठन अप्रैल 2026 तक लगभग 5,000 लीटर शहद उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रहा है, जिसे आगे बढ़ाकर हर साल 20,000 लीटर तक करने की योजना है।
कंपनी के सीईओ राजीव कुमार ने कहा, “वेदमृत पहल का उद्देश्य किसानों को कमाई का एक नया सहारा देना है, ताकि उनकी आय बढ़े और ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।”
वहीं, वेदमृत जिबिका एफपीओ की सदस्य किसान मंजू पटेल ने कहा, “प्रशिक्षण और सहयोग मिलने से अब हमें खेती के साथ कमाई का एक और भरोसेमंद रास्ता मिला है।”
मधुमक्खी-पालन से सिर्फ शहद ही नहीं मिलता, बल्कि इससे फसलों में परागण बढ़ने से पैदावार भी बेहतर होती है। कंपनी का लक्ष्य है कि वर्ष 2028 तक इस पहल से 1,500 से ज्यादा किसानों को जोड़ा जाए, ताकि गाँवों में आय बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकें।