97 हजार नल और 20 हजार खाली प्लॉट जांच के दायरे में, बड़े नाम होंगे उजागर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इस बार ठगों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रमुख सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुबोध सिंह के नाम से फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर उनके परिचितों से ऑनलाइन पैसे मांगने की कोशिश की। मामले की जानकारी मिलते ही सुबोध सिंह ने इसकी शिकायत पुलिस से की, जिसके बाद साइबर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।


जानकारी के अनुसार फर्जी फेसबुक अकाउंट सोमवार को तैयार किया गया। प्रोफाइल बनते ही ठग ने बड़ी संख्या में फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना शुरू कर दिया और महज दो घंटे के भीतर 58 लोगों को अपनी फ्रेंड लिस्ट में जोड़ लिया। इसके बाद मैसेंजर के जरिए परिचितों को तत्काल आर्थिक मदद की जरूरत बताकर पैसों की मांग वाले संदेश भेजे गए। समय रहते लोगों को इसकी जानकारी मिल जाने से किसी बड़ी ठगी की आशंका टल गई।


प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधी अब बैंक कॉल, ओटीपी या लिंक भेजने जैसे पारंपरिक तरीकों के बजाय भरोसे का फायदा उठाने वाली ठगी पर अधिक जोर दे रहे हैं। इसके लिए वे वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों या परिचित लोगों के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर हूबहू सोशल मीडिया प्रोफाइल तैयार करते हैं। इसके बाद किसी आपात स्थिति, इलाज या अन्य जरूरी काम का हवाला देकर ऑनलाइन रकम मांगते हैं। कई मामलों में लोग बिना पुष्टि किए ही पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।

छत्तीसगढ़ में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। बीते वर्षों में कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों, पूर्व मुख्य सचिवों, मंत्रियों, विधायकों तथा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम से भी फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर लोगों से पैसे मांगने की शिकायतें दर्ज हुई थीं। जांच के दौरान ऐसे कई मामलों के तार दूसरे राज्यों में सक्रिय साइबर ठगी गिरोहों से जुड़े पाए गए हैं।


साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी परिचित, अधिकारी या रिश्तेदार के नाम से सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर पैसे मांगने का संदेश मिले तो पहले संबंधित व्यक्ति से सीधे फोन पर संपर्क कर उसकी पुष्टि करें। किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल या संदेश की तत्काल शिकायत साइबर पुलिस और संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करें। अधिकारियों का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तस्वीरों और वास्तविक प्रोफाइल जैसी दिखने वाली फर्जी आईडी के कारण ऐसे मामलों की पहचान पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसलिए सतर्कता और जानकारी की पुष्टि ही साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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