गुरुवार को शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। लंबे समय के बाद टेक कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल आया। विप्रो, इंफोसिस और टीसीएस जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। इस तेजी से बाजार में रौनक लौट आई। बीएसई का सेंसेक्स 579 अंक मजबूत होकर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी भी 169 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ।

5 साल की कमाई डूबी: टीसीएस को लगा बड़ा झटका
भले ही गुरुवार को टेक कंपनियों के शेयरों में सुधार हुआ हो, लेकिन पिछला रिकॉर्ड देखें तो कहानी कुछ और ही है। बीते पांच सालों में इन दिग्गज कंपनियों ने निवेशकों को कोई खास मुनाफा नहीं दिया है। कई कंपनियों का रिटर्न तो शून्य या माइनस में रहा है। देश की सबसे बड़ी टेक कंपनी टीसीएस का हाल सबसे ज्यादा खराब रहा। सालभर से भी कम समय में टीसीएस का कुल बाजार मूल्य 16 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 7 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।
अमेरिका से जुड़ा है कंपनियों की मंदी का कनेक्शन
भारतीय टेक कंपनियों की इस हालत के पीछे अमेरिका का बड़ा हाथ है। दरअसल अमेरिकी बाजार में आई मंदी और वहां की कंपनियों में हुई बिकवाली का असर भारत पर पड़ा है। नई तकनीकों के आने से इन कंपनियों के पुराने कामकाज के तरीकों पर दबाव बढ़ा है। हाल ही में अमेरिका की बड़ी कंपनी एक्सेंचर ने आने वाले समय में कम कमाई का अनुमान जताया था। एक्सेंचर ने कहा था कि बड़े ग्राहक अब सोच-समझकर पैसा खर्च कर रहे हैं।
विप्रो और इंफोसिस के छूटे पसीने
अमेरिकी कंपनियों के इस फैसले का सबसे बुरा असर विप्रो और इंफोसिस पर पड़ा है। इन दोनों कंपनियों के विदेशी शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। विप्रो का आधा से ज्यादा कारोबार अमेरिका से चलता है, इसलिए इसके विदेशी शेयर 14 फीसदी तक टूट गए। इंफोसिस का भी 60 फीसदी कामकाज उत्तरी अमेरिका से जुड़ा है, जिससे इसके विदेशी शेयर 7 से 8 फीसदी तक गिर गए।
महीनेभर में डूबे पैसे, एक दिन की तेजी से राहत
गुरुवार को विप्रो का शेयर दो फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ 174 रुपये पर बंद हुआ। राहत की बात यह रही कि पिछले एक महीने में यह शेयर 17 फीसदी तक गिर चुका था। दूसरी तरफ इंफोसिस का शेयर भी करीब छह फीसदी की तेजी के साथ 1042 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि इंफोसिस भी बीते एक महीने में 18 फीसदी तक टूट चुका था। बाजार के जानकारों का मानना है कि एक दिन की यह तेजी अच्छी है, लेकिन पूरी रिकवरी में अभी लंबा समय लग सकता है।