TCS AGM 2026: क्या एआई खा जाएगा आईटी सेक्टर की नौकरियां? टीसीएस चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने एजीएम में दिया बड़ा बयान

मुंबई। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस की 31वीं वार्षिक आम बैठक में नौकरियों को लेकर बड़ी बात सामने आई है। इस एजीएम (TCS AGM 2026) में कंपनी के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने साफ कर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आईटी सेक्टर को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने युवाओं और कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि टीसीएस में किसी भी तरह की छंटनी का कोई प्लान नहीं है (No Layoff in TCS)। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में बड़े पैमाने पर होने वाली नई भर्तियों की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर हो सकती है।

इंसानी कर्मचारियों के बराबर होंगे एआई एजेंट्स

चंद्रशेखरन ने वर्कफोर्स को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा कि अगले 3 साल के भीतर टीसीएस के पास जितने इंसानी कर्मचारी हैं, ठीक उतने ही एआई एजेंट्स (AI Agents in TCS) भी काम कर रहे होंगे। यह दोनों मिलकर काम करेंगे जिससे कंपनी की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। चेयरमैन ने इसे टीसीएस के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और शानदार मौका बताया है। उन्होंने बाजार की उन चिंताओं को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि जेनरेटिव एआई (Generative AI) भारतीय आईटी कंपनियों के बिजनेस मॉडल को बर्बाद कर देगा।

एआई से होगी अरबों डॉलर की बंपर कमाई

बिजनेस के लिहाज से टीसीएस के लिए यह तकनीक फायदे का सौदा साबित हो रही है। वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (TCS Q4 Results 2026) तक कंपनी की एआई डील पाइपलाइन का साइज 2.5 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। कंपनी मैनेजमेंट को पूरा भरोसा है कि एआई से होने वाली कमाई हर साल दोगुनी रफ्तार से बढ़ेगी। साल 2028 से 2030 के बीच कंपनी के कुल रेवेन्यू (TCS Total Revenue) में एआई की हिस्सेदारी सबसे बड़ी होगी।

भविष्य के लिए टीसीएस का मेगा प्लान

इस बड़े बदलाव को संभालने के लिए टाटा की यह दिग्गज आईटी कंपनी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुट गई है। टीसीएस इस समय एआई टैलेंट, डेटा सेंटर्स (Data Centers) और सॉवरेन क्लाउड जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रही है। चंद्रशेखरन का मानना है कि आने वाले 3 वर्षों में ग्लोबल आईटी इंडस्ट्री (Global IT Industry Growth) का आकार 3 लाख करोड़ डॉलर के पार निकल जाएगा। ऐसे में एआई सिर्फ कोडिंग का काम आसान नहीं करेगा, बल्कि पूरी दुनिया में आईटी की मांग को कई गुना बढ़ा देगा।

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