-सुभाष मिश्रहसदेव अरण्य की आज हंसी गायब है। आखिर किसी भी जंगल या अरण्य की हंसी क्यों गायब हो जाती है? जंगल हमको इसलिए अच्छा लगते हंै, क्योंकि वहां तरह-तरह के पशु-पक्षी और पेड़-...
-सुभाष मिश्रहमारे समाज में जो अपराध बढ़ रहा है, उसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि अपराधियों का महिमा मंडन बहुत ज्यादा हो रहा है। समाज में अपराध बहुत अधिक बढ़ रहा है, इसके पीछे की वज...
-सुभाष मिश्रअब कानून अंधा नहीं रहा। कई बार बात होती है कि अंधा कानून है, क्योंकि अब तक न्याय की देवी की आंखों पर काली पट्टी बंधी होती थी। पट्टी बांधने का अर्थ यह होता है कि न्य...
-सुभाष मिश्रजेल में तरह-तरह के खेल हो रहे हैं। यह खेल अलग तरह का है। यह खेल उस तरह का खेल नहीं है, जो प्रतिस्पर्धा में होते हैं या कोई संस्था कंपटीशन करवाती है। जेल में कोई जात...
-सुभाष मिश्रदिवाली अभी दूर है, लेकिन दिवाली के लिए तोहफे खरीदने का सिलसिला शुरू हो चुका है। बहुत सारे बंपर इनाम देने की भी बात हो रही है और इसके लिए विज्ञापन निकाल रहे हैं। दिव...
-सुभाष मिश्रएक बार फिर चुनाव का मौसम आ गया है। इस बार चुनाव दो राज्यों महाराष्ट्र और झारखंड की विधानसभाओं का हो रहा है। अभी थोड़े दिन पहले हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा के च...
-सुभाष मिश्रकि़स्से कहानी हमें हमेशा अच्छे लगते है। हमारे यहाँ किस्सोगोई की परंपरा पुरानी है। रहस्य-रोमांच, राजा-रानी, प्रेम और अपराध की कहानी ज़्यादा लोकप्रिय है। कहानी कहना भ...
-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ में नक्सलाइट ऑपरेशन में 31 नक्सली मारे गए, पुलिस का एक जवान घायल हुआ है और मौके पर सर्च ऑपरेशन जारी बताया जा रहा है।
उम्मीद की जा रही है कि इससे ज्यादा स...
-सुभाष मिश्रहमारे देश में जातिगत अस्मिता की जड़ें बहुत गहरी हैं। हर जाति का अपना एक स्टेक्चर है। जातियों के भीतर भी बहुत सी उपजातियाँ समाहित है। सतही...
-सुभाष मिश्रहमारे पारंपरिक उत्सवों का स्वरूप बदलता जा रहा है। मोहल्ले, चौक-चौराहे में होने वाले गणेश, दुर्गा पंडालों में अब बाज़ार द्वारा तय आयोजन ज़्यादा हो रहे हैं। पहले समाज...