कटनी। मध्य प्रदेश का महत्वपूर्ण कटनी रेलवे जंक्शन अब अपराधियों और अवैध वेंडरों के आतंक का केंद्र बनता जा रहा है जहां कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। आरपीएफ और जीआरपी की घोर लापरवाही के कारण यात्रियों को सफर के दौरान अपनी जान की भीख मांगनी पड़ रही है। ताजा घटनाक्रम में कटनी से बीना जा रही मेमू ट्रेन खूनी संघर्ष का अखाड़ा बन गई जब सलैया के दबंग अवैध वेंडरों ने मामूली विवाद पर दमोह के यात्रियों पर धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। इस बर्बर हमले में दो यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए और पूरी ट्रेन में चीख-पुकार मच गई। सुरक्षा बलों की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर वेंडर यात्रियों को बेरहमी से पीटते रहे और रेलवे का सुरक्षा तंत्र गहरी नींद में सोया रहा।
बकलेहटा स्टेशन पर पथराव और बवाल: सुरक्षा के लिए इंजन में घुसे यात्री
रीठी स्टेशन के पास शुरू हुआ यह विवाद बकलेहटा स्टेशन पहुँचते-पहुँचते उग्र विद्रोह में बदल गया जहाँ आक्रोशित यात्रियों ने अपनी सुरक्षा की गुहार लगाते हुए ट्रेन के इंजन पर धावा बोल दिया। स्थिति इस कदर बेकाबू हो गई कि लोको पायलट को अपनी जान बचाने के लिए ट्रेन रोकनी पड़ी और तत्काल कंट्रोल रूम को इसकी जानकारी दी। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई जिससे स्टेशन परिसर युद्ध का मैदान नजर आने लगा और आम मुसाफिरों में भगदड़ मच गई। रेलवे पुलिस की गैरमौजूदगी ने उपद्रवियों के हौसले इतने बुलंद कर दिए कि उन्होंने घंटों तक रेल यातायात को बंधक बनाए रखा और आम जनता दहशत के साये में स्टेशन पर खड़ी रही।
अंधेरे का फायदा उठाकर भागे हमलावर: रेलवे पुलिस की मुस्तैदी पर उठे गंभीर सवाल
जैसे ही रीठी थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुँची मारपीट और पथराव करने वाले असामाजिक तत्व अंधेरे का सहारा लेकर फरार होने में कामयाब रहे। पुलिस ने घायल यात्रियों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया जहाँ उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है लेकिन इस घटना ने रेलवे सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। कटनी जैसे बड़े जंक्शन से गुजरने वाली ट्रेनों में अवैध वेंडरों की बढ़ती दबंगई और लूटपाट की घटनाओं ने मुसाफिरों के भरोसे को तोड़ दिया है। करीब एक घंटे तक चले इस भारी हंगामे के बाद ट्रेन को गंतव्य के लिए रवाना किया गया जबकि आरपीएफ और जीआरपी की टीमें घंटों देरी से घटना स्थल पर पहुँचीं जो विभाग की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली को उजागर करता है।