सुप्रीम कोर्ट से बिहार के भोजपुर फेक एनकाउंटर मामले में याचिकाकर्ता को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने इस मामले पर सीधे सुनवाई करने से साफ मना कर दिया है। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को पटना हाई कोर्ट जाने की आजादी दी है। इस मामले में पुलिस मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की गई थी।
जस्टिस एमएम सुंद्रेश और जस्टिस शील नागू की बेंच के सामने यह मामला आया था। जैसे ही याचिकाकर्ता के वकील विशाल तिवारी ने बहस शुरू करनी चाही, कोर्ट ने उन्हें रोक दिया। कोर्ट ने इस दौरान दो कड़े सवाल भी पूछे।
कोर्ट ने पूछा- सीधे यहां क्यों आए
सुनवाई शुरू होते ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पहला सवाल किया कि वे सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों चले आए। इस मामले की सुनवाई के लिए हाई कोर्ट ज्यादा सही जगह है। इस पर वकील ने दलील दी कि मामला बहुत गंभीर है और इससे जुड़ी एक याचिका पहले से सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए इस पर यहीं सुनवाई होनी चाहिए।
दूसरा सवाल- याचिकाकर्ता कौन है
इसके बाद कोर्ट ने दूसरा सवाल पूछा कि याचिका दाखिल करने वाला शख्स कौन है। जब वकील ने बताया कि यह एक जनहित याचिका यानी आम जनता के फायदे के लिए दाखिल की गई अर्जी है, तो कोर्ट ने सुनवाई से पूरी तरह इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहे तो राहत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।
क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला भारत भूषण तिवारी नाम के शख्स से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सत्रह जून को बिहार के भोजपुर में पुलिस ने भारत भूषण का फर्जी एनकाउंटर किया था। याचिका में उसके पिता के बयान का भी जिक्र है। पिता का दावा है कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने सरेंडर यानी आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी।
इस याचिका में मांग की गई थी कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से कराई जाए। साथ ही मुठभेड़ में शामिल पुलिस टीम पर केस दर्ज हो और सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की देखरेख में एक जांच कमेटी बने। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सही-गलत बातों पर कोई टिप्पणी नहीं की और याचिका को खारिज कर दिया।