स्ट्रीट लाइट के नाम पर खेल? पंचायत ने खर्च दिखाया, गांव फिर डूबा अंधेरे में
सोनहत विकासखंड के ग्राम पंचायत केसगवां में स्ट्रीट लाइट मरम्मत को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पंचायत द्वारा 15वें वित्त आयोग की राशि से 50 हजार रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया, लेकिन गांव की गलियां आज भी अंधेरे में डूबी हुई हैं।
केसगवां चौक से सूर्यवंशी मोहल्ला तक वर्षों से खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत कुछ माह पहले कराई गई थी। ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड में पूरा खर्च दर्ज है, लेकिन मरम्मत की गुणवत्ता इतनी खराब रही कि 50 दिन के भीतर ही आधे से ज्यादा स्ट्रीट लाइटें बंद हो गईं।
ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत कार्य न तो मानकों के अनुसार हुआ और न ही उसकी कोई तकनीकी जांच कराई गई। सवाल यह भी उठ रहा है कि बिना लाइट जले ही पूरा भुगतान कैसे कर दिया गया।
रात होते ही गांव में घना अंधेरा छा जाता है, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में है। चोरी, दुर्घटना और असामाजिक गतिविधियों की आशंका लगातार बनी हुई है, लेकिन पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों का मानना है कि 15वें वित्त की राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई, और मरम्मत केवल कागजों तक सीमित रही। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर कार्रवाई और दोबारा गुणवत्तापूर्ण स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यही है —
क्या प्रशासन 50 हजार के इस अंधेरे का हिसाब लेगा, या मामला फाइलों में ही दबा दिया जाएगा?