जहां वन है वहां गर्मी से राहत

तापमान कम करने बढ़ाने होंगे जंगल के रकबे

राजकुमार मल

भाटापारा- महज 7 से 32 फीसदी वन क्षेत्र। तापमान 41 से 44 डिग्री सेल्सियस। मध्य छत्तीसगढ़ के आठ जिले घटते वन क्षेत्र और बढ़ते तापमान की वजह से अब हीट स्ट्रेस और हीट स्ट्रोक के घेरे में आ चुके हैं।

वैश्विक तापमान में वृद्धि और अल नीनो जैसी घटनाएं प्रदेश में गर्मी की तीव्रता भले ही बढ़ा रही हों लेकिन इसमें स्थानीय गतिविधियों को भी कम करके देखा नहीं जा सकता। इसमें घटते वन क्षेत्र, बढ़ते शहरीकरण, कांक्रीट एवं कोलतार की सड़कें और बहुमंजिला भवनों का निर्माण मुख्य माना जा रहा है।


तप रहा मध्य छत्तीसगढ़

महज 7% वन क्षेत्र वाला बालोद जिला 41 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ सबसे तेज गर्मी वाले जिलों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 42 डिग्री सेल्सियस तापमान पर जाने के बाद बिलासपुर जिला महसूस होने वाले तापमान के मामले में इसलिए सबसे आगे है क्योंकि कांक्रीट की सड़कें व तेज औद्योगिकीकरण और शहरीकरण की गति सबसे ज्यादा है। कोरबा- रायगढ़, जांजगीर, चांपा, बलौदा बाजार, रायपुर, दुर्ग, भिलाई में घटता वन क्षेत्र और बढ़ता तापमान वानिकी वैज्ञानिकों की नजर में इसलिए चिंताजनक माना जा रहा है क्योंकि यह सभी क्षेत्र अब अर्बन हीट आईलैंड की सूची में दर्ज हो चुके हैं।


दक्षिण और उत्तरी क्षेत्रों में राहत

बीजापुर में वन क्षेत्र 79%, तापमान 37 डिग्री सेल्सियस, नारायणपुर जिले में 77% वन क्षेत्र, तापमान 37 डिग्री सेल्सियस, सुकमा जिले में 74% वन क्षेत्र और 36 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया जा रहा है, तो 67 प्रतिशत वन क्षेत्र तथा तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के साथ कांकेर और 65% वन क्षेत्र, 38 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ बस्तर जिला सबसे कम तापमान और समृद्ध वन क्षेत्र वाले जिलों में अपना नाम दर्ज करवा चुके हैं। बताते चलें कि बढ़ते वन क्षेत्र और घटते तापमान वाले जिलों में शामिल होने के बाद यह सभी शेष छत्तीसगढ़ के लिए आदर्श बन रहे हैं।


करना होगा यह काम

पेड़- पौधे प्राकृतिक एयर कंडीशनर की तरह काम करते हैं। इसकी वजह से वातावरण ठंडा रहता है। परिपक्व वृक्ष 200 से 400 लीटर तक पानी वायुमंडल में छोड़ता है। इसकी वजह से गर्मी नियंत्रण में रहती है। खनन क्षेत्र का पुनर्वनीकरण व प्रभावित क्षेत्रों में विशेष तौर पर मिनी फॉरेस्ट एरिया विकसित करना होगा। कृषि वानिकी को बढ़ावा देने वाली योजनाएं अनिवार्य करने के साथ-साथ, नदी एवं नाला तटों पर हरित पट्टी विकसित करना होगा ताकि क्षेत्र का प्राकृतिक स्वरूप एवं तापमान नियंत्रण में रहे।

शहरी हरित क्षेत्रों का विस्तार समय की आवश्यकता

वन क्षेत्र और तापमान के बीच सीधा संबंध है। जिन जिलों में वनावरण अधिक है, वहां तापमान अपेक्षाकृत कम और वातावरण अधिक संतुलित है, जबकि कम वन क्षेत्र वाले जिलों में हीट स्ट्रेस, हीट स्ट्रोक और अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, खनन क्षेत्रों का पुनर्वनीकरण, कृषि वानिकी को बढ़ावा तथा शहरी हरित क्षेत्रों का विस्तार समय की आवश्यकता है।

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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