सड़क सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक मॉडल अपनाएगा छत्तीसगढ़, 10 संवेदनशील जिलों से होगी शुरुआत
रमेश गुप्ता
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने डेटा और आधुनिक तकनीक आधारित नई पहल शुरू की है। इसी दिशा में गुरुवार को रायपुर में परिवहन विभाग और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र (CoERS) के संयुक्त तत्वावधान में डेटा-आधारित हाइपरलोकल इंटरवेंशन (DDHI) विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान दोनों संस्थानों के बीच सड़क सुरक्षा कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वन, परिवहन, आवास एवं पर्यावरण तथा सहकारिता मंत्री केदार कश्यप उपस्थित रहे।

दुर्घटना संभावित स्थलों की होगी वैज्ञानिक पहचान
कार्यशाला में अधिकारियों को सड़क दुर्घटनाओं के डेटा विश्लेषण, ब्लैक स्पॉट की पहचान, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का आकलन, कम लागत वाले अभियांत्रिकी सुधार तथा ‘संजय’ (Sanjaya) प्लेटफॉर्म के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से दुर्घटना संभावित स्थलों की समय रहते पहचान कर साक्ष्य-आधारित निर्णय लिए जा सकेंगे, जिससे दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
पहले चरण में 10 संवेदनशील जिलों पर रहेगा फोकस
कार्यक्रम में बताया गया कि पहले चरण में सड़क दुर्घटनाओं की दृष्टि से राज्य के सबसे अधिक संवेदनशील 10 जिलों का चयन किया गया है। इन जिलों में जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप डेटा-आधारित सड़क सुरक्षा कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
आधुनिक तकनीक से मजबूत होगा सड़क सुरक्षा प्रबंधन
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए पारंपरिक उपायों के साथ आधुनिक तकनीक, डेटा विश्लेषण और वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग किया जाएगा। इससे ब्लैक स्पॉट की पहचान, त्वरित हस्तक्षेप और सुरक्षित सड़क परिवेश विकसित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही अधिकारियों की तकनीकी एवं संस्थागत क्षमता भी मजबूत होगी।
मंत्री बोले- हर दुर्घटना एक परिवार की अपूरणीय क्षति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रत्येक सड़क दुर्घटना किसी परिवार के लिए अपूरणीय क्षति होती है। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं, बल्कि ऐसी सुरक्षित सड़क व्यवस्था विकसित करना है, जिससे प्रत्येक नागरिक सुरक्षित अपने घर पहुंच सके। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल सुरक्षित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
सचिव एस. प्रकाश ने बताया दीर्घकालिक योजना
परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश ने कहा कि आईआईटी मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र के सहयोग से राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ‘संजय’ प्लेटफॉर्म के जरिए दुर्घटना संभावित स्थलों की वैज्ञानिक पहचान कर समयबद्ध और साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी दीर्घकालिक होगी और चयनित जिलों में सतत निगरानी, क्षमता संवर्धन तथा प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा।
विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण
राज्य स्तरीय इस कार्यशाला में चयनित जिलों के जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO), जिला परिवहन अधिकारी (DTO), राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक (DRM), जिला सड़क सुरक्षा समिति के नोडल अधिकारियों सहित सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लेकर प्रशिक्षण प्राप्त किया।