ऑपरेशन ग्रीन्स और मूल्य संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की मांग
नई दिल्ली। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने प्राकृतिक आपदा और बंपर पैदावार के समय किसानों को फसलों के औने-पौने दाम मिलने की समस्या को संसद में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि ऑपरेशन ग्रीन्स के अल्पकालिक हस्तक्षेप घटक के लिए अब तक कितना बजट आवंटित किया गया और वास्तव में कितना व्यय हुआ। सांसद बृजमोहन अग्रवाल का जोर इस बात पर रहा कि संकट के समय किसानों के लिए मूल्य संरक्षण व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाया जाए।
कृषि मंत्रालय में स्थानांतरित हुआ ऑपरेशन ग्रीन्स का घटक
सांसद के सवाल का जवाब देते हुए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने बताया कि ऑपरेशन ग्रीन्स का परिवहन एवं भंडारण घटक वर्ष 2023-24 से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय से स्थानांतरित कर कृषि और किसान कल्याण विभाग को सौंप दिया गया है। इसी वजह से वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय को इस मद में कोई नया बजट आवंटित नहीं किया गया।
‘पीएम-आशा’ और बाजार हस्तक्षेप योजना से मिलेगी सहायता
राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि फसलों के दामों में गिरावट की स्थिति में अब ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ (PM-AASHA) के तहत बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) के माध्यम से वित्तीय सहायता दी जाती है। यह व्यवस्था राज्य सरकारों के अनुरोध और लागत साझेदारी की सहमति पर लागू होती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बंपर उत्पादन के दिनों में किसानों को संकटपूर्ण बिक्री (डिस्ट्रेस सेल) से बचाना और उन्हें सही मूल्य दिलाना है।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग और त्वरित फैसले लेने पर जोर
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आग्रह किया कि मूल्य गिरावट के समय किसानों को बिना किसी देरी के त्वरित सहायता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है। हालांकि, आवश्यकता इस बात की है कि मूल्य संरक्षण योजनाओं का लाभ किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और आम किसानों तक तेजी, पारदर्शिता और तकनीक के माध्यम से पहुंचे।
केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित देशभर के किसानों को योजनाओं का पूरा लाभ दिलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। इसके साथ ही रियल-टाइम बाजार निगरानी और त्वरित निर्णय व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार कृषि विपणन और मूल्य संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर काम करती रहेगी।